पेरिस के बुसी-सेंट-जॉर्जेस में बीएपीएस (BAPS) स्वामीनारायण हिंदू मंदिर का भव्य उद्घाटन होने जा रहा है। यह मंदिर भारत-फ्रांस के बीच मजबूत होते सांस्कृतिक संबंधों का बड़ा प्रतीक है। यह केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सामुदायिक जुड़ाव और विभिन्न धर्म के लोगों के बीच आपसी सौहार्द का प्रमुख केंद्र भी बनेगा। लगभग 5,000 वर्ग मीटर में फैला यह पूरा मंदिर परिसर इस सितंबर में आयोजित होने वाले 13 दिवसीय ऐतिहासिक 'संस्कृति महोत्सव' के साथ आधिकारिक तौर पर खुलने जा रहा है, जिसका उद्घाटन महंत स्वामी महाराज जी करेंगे। इस महोत्सव में फ्रांस और दुनिया भर से हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
13 दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव के साथ खुलेगा मंदिर
मंदिर के भव्य उद्घाटन के उपलक्ष्य में 2 से 14 सितंबर तक 13 दिनों का भव्य सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित किया जाएगा। महंत स्वामी महाराज के पावन कर-कमलों द्वारा 6 सितंबर को मंदिर का उद्घाटन और प्राण-प्रतिष्ठा समारोह संपन्न होगा। इस भव्य सांस्कृतिक महोत्सव में कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल होंगे जो इस प्रकार हैं:
- पालकी यात्रा - 2 सितंबर
- वैदिक महायज्ञ - 2 से 13 सितंबर
- जल यात्रा - 3 सितंबर
- नगर यात्रा - 5 सितंबर
- मूर्ति प्रतिष्ठा - 6 सितंबर
- समर्पण सभा - 6 सितंबर
- महंत स्वामी महाराज जन्म जयंती - 13 सितंबर
- हिंदू सांस्कृतिक उत्सव - 14 सितंबर
मंदिर की खासियतें
- यह भव्य मंदिर पारंपरिक भारतीय वास्तुकला और आधुनिक फ्रेंच इंजीनियरिंग का एक अनूठा उदाहरण है।
- ऊपरी तल पर पारंपरिक मंदिर और निचले तल पर 'मारू गुर्जर' शैली में निर्मित भव्य सांस्कृतिक हवेली बनाई गई है।
- परिसर में 5 भव्य शिखर, 10 विशाल गुंबद, बारीक नक्काशी वाले 20 स्तंभ, 120 नक्काशीदार खिड़कियां, 49 मूर्तिकला पैनल और 4 सुंदर छतरियां शामिल हैं।
- मंदिर के निर्माण के लिए ग्रीस, इटली, वियतनाम और भारत से विशेष संगमरमर और ग्वालियर से बलुआ पत्थर मंगाए गए हैं।
- भारत में कुशल कारीगरों ने इन पत्थरों को हाथों से तराशा और फिर इन्हें फ्रांस भेजकर मंदिर में स्थापित किया गया।

इस मंदिर को लेकर महंत स्वामी महाराज का प्रेरणादायक संदेश
महंत स्वामी महाराज जी ने कहा कि इस मंदिर का निर्माण किसी एक समुदाय की पहचान स्थापित करने के लिए नहीं, बल्कि विभिन्न पहचान वाले लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने के लिए हुआ है। हमारे रास्ते भले ही अलग हों, लेकिन सम्मान और सहअस्तित्व की जमीन एक हो सकती है।
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