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'क्या आप भी हाईकोर्ट के ख़िलाफ़ खड़े होंगे? मन की बात कहिए', हिजाब पर अखिलेश यादव से राजभर ने किया सवाल

 Reported By: Ruchi Kumar Written By: Niraj Kumar
 Published : Aug 25, 2026 12:57 pm IST,  Updated : Aug 25, 2026 01:00 pm IST

यूपी सरकार में पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर ने हिजाब विवाद पर अखिलेश यादव से सवाल किया है। राजभर ने पूछा कि क्या अखिलेश जी अब भी आप हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ खड़े होंगे? कह दीजिए अपने मन की बात।

OP Rajbhar and Akhilesh yadav- India TV Hindi
ओपी राजभर और अखिलेश यादव Image Source : PTI

लखनऊ: हिजाब को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से एक बार फिर सियासत की आंच सुलगने लगी है। हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद योगी सरकार में मंत्री ओपी राजभर ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट के जरिए सवाल किया। राजभर ने पूछा कि क्या अखिलेश जी अब भी आप हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ खड़े होंगे? कह दीजिए अपने मन की। आपका मन भी दुखी हुआ होगा इस फैसले से। दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल में स्कार्फ या हिजाब पहनने की अनुमति देने का स्कूल अधिकारियों को निर्देश जारी करने के अनुरोध वाली याचिका सोमवार को खारिज कर दी । 

राजभर ने क्या लिखा?

ओपी राजभर ने लिखा-"मित्र अखिलेश जी,  हाईकोर्ट का आदेश तो आपने पढ़ा हो होगा। स्कूलों में हिजाब पहनने पर हाईकोर्ट को तरफ़ से रोक लगा दी गई है। आपके प्रवक्ता तो खुलकर हाईकोर्ट के ख़िलाफ़ खड़े हो गए हैं। आपका क्या रुख़ है? क्या आप भी हाईकोर्ट के ख़िलाफ़ खड़े होंगे? कह दीजिए अपने मन की। कह दीजिए हाईकोर्ट के इस आदेश से आपका मन दुखा है। इंतज़ार है आपके जवाब का? बताइए हिजाब को लेकर आप क्या सोचते हैं? मौलाना लोग जानना चाहते हैं?"

जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की डिवीजन बेंच ने कहा कि शिक्षण संस्थान के निर्धारित ड्रेस कोड का पालन जरूरी है। हाईकोर्ट ने कहा कि छात्रा यह साबित करने के लिए पर्याप्त धार्मिक प्रमाण नहीं दे सकी कि स्कूल में सिर पर स्कार्फ पहनना इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा है।

छात्रा सुकैना रिजवी ने दायर की थी याचिका

प्रयागराज के अतरसुइया थाना अंतर्गत टैगोर पब्लिक स्कूल की छात्रा सुकैना रिजवी ने अपनी मां के जरिए यह याचिका दायर की थी। रिजवी ने इस स्कूल से दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है और वह इसी स्कूल में 11वीं कक्षा में प्रवेश ले रही है। अदालत ने कहा, ''जब कभी भी यह मुद्दा उठा है, उच्च न्यायालयों का एकमत रहा है कि हिजाब पहनना इस्लामिक आस्था का आवश्यक हिस्सा नहीं है और एक महिला के हिजाब नहीं पहनने से आस्था खतरे में नहीं पड़ जाएगी।'' 

कर्नाटक हाईकोर्ट के 2022 के फैसले का जिक्र

सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के 2022 के फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें हिजाब को इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं माना गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट के निष्कर्ष से अलग राय रखने का पर्याप्त आधार नहीं है। 

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