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पितरों का श्राद्ध और तर्पण के बाद भूलकर भी नहीं करने चाहिए ये काम, वरना नहीं मिलेगा पूर्वजों का आशीर्वाद

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Sep 22, 2026 10:54 pm IST,  Updated : Sep 22, 2026 10:54 pm IST

पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। लेकिन श्राद्ध कर्म पूरा होने के बाद भी इन बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। तो आइए जानते हैं कि श्राद्ध और तर्पण के बाद कौनसे कार्य नहीं करना चाहिए।

पितृ पक्ष 2026- India TV Hindi
पितृ पक्ष 2026 Image Source : INDIA TV

इस साल पितृ पक्ष 26 सितंबर 2026 से शुरू हो रहे हैं। इस दौरान पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। पितरों का स्मरण और पूजन के लिए पितृ पक्ष का समय सबसे उत्तम माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन लोगों पर उनके पूर्वजों का आशीर्वाद रहता है उन्हें जीवन में कभी कोई बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। घर का भंडार धन-धान्य से सदैव भरा रहता है। वहीं जिनसे पूर्वज नाराज रहते हैं उन्हें पितृ दोष की संभावना बनी रहती है। पितृ दोष से प्रभावित व्यक्ति को करियर, कारोबार में असफलता और आर्थिक दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा का शांति मिलती है। शास्त्र में श्राद्ध और तर्पण करने के बाद इन कार्यों को करने की मनाही होती है। तो आइए जानते हैं कि वो कौनसे काम हैं जिन्हें नहीं करना चाहिए।

पितरों का श्राद्ध और तर्पण के बाद बिल्कुल भी न करें ये काम

  1. पितरों का पूजन, श्राद्ध या तर्पण करने के बाद कभी भी तुरंत आराम नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि श्राद्ध कर्म के करीब एक पहर यानी लगभग 3 घंटे बाद आराम करना चाहिए। ये नियम बुजुर्गों और अस्वस्थ व्यक्ति पर लागू नहीं होता है। पितरों का तर्पण या श्राद्ध करने के बाद पूर्वजों को याद करें और दान-पुण्य जैसे पुण्य कार्य करें।

  2. पितृ पक्ष में आप जिस दिन पितरों का श्राद्ध कर रहे हैं उस दिन घर का वातावरण शांत और सकारात्मक रखें। इस दिन किसी पर क्रोध न करें और लड़ाई-झगड़ा करने से बचें। इसके अलावा घर के बड़े-बुजुर्गों का अपमान तो भूलकर भी करें। 

  3. पितरों का तर्पण और श्राद्ध करने के तुरंत बाद भोजन नहीं करें। श्राद्ध पूजा के बाद सबसे पहले ब्राह्मण, गाय, कुत्ते, कौए और चींटियों के लिए भोजन निकाला जाता है। इसके कुछ देर बाद भोजन ग्रहण करें। श्राद्ध भोजन के बाद ब्राह्मण को दक्षिणा या दान कर के ही विदा करें।

  4. जिस दिन आप पितरों का श्राद्ध और तर्पण कर रहे हैं उस दिन घर में तामसिक भोजन न बनाएं और न ही बाहर कहीं सेवन करें। इस दिन मांस, मछली, प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा शराब और अन्य नशीली चीजों से भी दूरी बनाकर रखें। पितरों का पूजन और श्राद्ध कर्म के बाद हमेशा सात्विक आहार ही खाना चाहिए।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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