रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। तो वहीं इस दिन राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 57 मिनट से सुबह 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये त्योहार क्यों मनाया जाता है और इस पर्व की पौराणिक कथा क्या है? तो आपको बता दें इस त्योहार से जुड़ी कई कथाएं सुनने को मिलती हैं। लेकिन आज हम जिस कथा के बारे में आपको बताने जा रहे हैं उसका संबंध देवताओं के राजा इंद्र देव और उनकी पत्नी इंद्राणी से है। भविष्य पुराण के अनुसार पहली बार रक्षासूत्र या राखी एक बहन ने भाई को नहीं, बल्कि एक पत्नी ने पति को बांधी थी। चलिए जानते हैं राखी पर्व से जुड़ी इंद्र और इंद्राणी की अमर कथा।
इंद्र-इंद्राणी की अमर कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय देवताओं और राक्षसों के बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया और 12 वर्षों तक चले इस भीषण युद्ध में दानव हावी होने लगे थे। यह देख इंद्र समेत सभी देवता काफी चिंतित हो गए। उधर इंद्र देव की पत्नी इंद्राणी को भी चिंता सताने लगी। इंद्राणी चिंतित होकर देव गुरु बृहस्पति के पास गईं और उनसे देवताओं की जीत का उपाय पूछने लगीं। तब बृहस्पति देव ने उन्हें एक पवित्र धागा (राखी) बनाने और उसे अभिमंत्रित कर इंद्र देव की कलाई पर बांधने की सलाह दी। बृहस्पति देव के कहने पर इंद्राणी ने श्रावण पूर्णिमा के दिन यह पवित्र धागा अपने पति इंद्र देव की कलाई पर बांधा। इसके बाद इंद्र को युद्ध में विजय प्राप्त हुआ। कहा जाता है कि इस घटना के बाद से ही कलाई पर रक्षासूत्र बांधने की परंपरा की शुरुआत हो गई और समय के साथ यह पर्व भाई-बहनों के रिश्ते को मजबूत करने का त्योहार बन गया। आज के समय में श्रावण पूर्णिमा के दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी आयु और सुखद जीवन की कामना करती हैं।
क्या आप जानते हैं कि राखी के त्योहार का संबंध माता लक्ष्मी और राजा बलि से भी माना जाता है। कहते हैं माता लक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई पर राखी बांधकर इस पावन त्योहार की शुरुआत की थी। इस दिव्य कथा के बारे में यहां पढ़ें
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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