हिंदू धर्म में सावन के महीने को धार्मिक-आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए बेहद शुभ माना जाता है। भगवान शिव को समर्पित इस महीने में महादेव की पूजा करने से भक्तों को शुभ फलों की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि सावन के महीने में भगवान शिव पृथ्वी पर आते हैं और अपने भक्तों का कल्याण करते हैं। ऐसे में आज हम आपको सावन से जुड़ी कुछ कथाओं के बारे में आपको बताएंगे जो आपको इस माह के महत्व को दर्शाएंगी।
माता पार्वती और भगवान शिव के मिलन की कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता सती के देह त्याग करने के बाद भगवान शिव घोर तपस्या में लीन हो गए थे। कई वर्षों के बाद फिर माता सती ने पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और उनका नाम पार्वती रखा गया। माता पार्वती बचपन से ही शिव भक्ति में लीन थीं। माना जाता है कि भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने सावन के पूरे माह में कठोर तप किया था। माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने सावन के महीने में ही उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था। इसलिए सावन के महीने को आज भी भक्त योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए शिव-पार्वती की पूजा करते हैं।
समुद्र मंथन से जुड़ी कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवताओं और असुरों ने जब मिलकर समुद्र मंथन किया तो सबसे पहले समुद्र से कालकूट नाम का विष निकला। यह विष इतना घातक था कि इसके प्रभाव से पूरी सृष्टि जलने लगी। इसके बाद सृष्टि की रक्षा करने के लिए भगवान शिव आगे आए और उन्होंने विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। विष के असर से भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया और इसीलिए शिव जी नीलकंठ कहलाए। विष की जलन और बुरे प्रभाव को दूर करने के लिए देवताओं ने महादेव पर बेलपत्र, भांग, धतूरा आदि का लेप लगाया और साथ ही दूध, जल आदि भी अर्पित किया। माना जाता है कि यह घटना सावन के महीने में ही हुई थी और इसीलिए आज भी भक्त महादेव को प्रसन्न करने के लिए सावन के महीने में शिव जी की भक्ति करते हैं।
भगवान शिव सावन में आते हैं धरती पर
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव सावन के महीने में पृथ्वी पर आते हैं। दरअसल भगवान शिव का ससुराल कनखल, हरिद्वार में हैं। माना जाता है कि सावन माह में जल रूप में अवतरित होकर भगवान शिव सावन के महीने में अपने ससुराल यानि दक्ष राजा के घर पधारते हैं। यही वजह है कि सावन के महीने में शिव जी की पूजा होती है और इस माह में शिवलिंग पर जल अर्पित करना बेहद शुभ फलदायक माना जाता है।
सावन सोमवार की व्रत कथा
सावन के महीने में सोमवार के दिन व्रत रखना और सोमवार की व्रत कथा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। सावन सोमवार की व्रत कथा के अनुसार, एक अमीर साहूकार जिसकी कोई संतान नहीं थी उसको शिव भक्ति करने से संतान की प्राप्ति हुई थी। संतान के रूप में साहूकार को पुत्र प्राप्त हुआ था लेकिन वो अल्प आयु था। हालांकि, भगवान शिव के प्रति साहूकार की अटूट आस्था और भक्ति के कारण साहूकार के बेटे को भगवान शिव ने दीर्घायु होने का आशीर्वाद दिया था।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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