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शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा होंगे 16 कलाओं से परिपूर्ण, जानें इनके नाम और महत्व

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Oct 23, 2026 09:34 pm IST,  Updated : Oct 23, 2026 09:34 pm IST

शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होते हैं। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि इन 16 कलाओं के नाम क्या हैं और इनका क्या महत्व है।

Chandrma Ki Kalayain - India TV Hindi
चंद्रमा की 16 कलाएं Image Source : MAGNIFIC

शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होते हैं। माना जाता है कि भगवान शिव ने चंद्रमा की तपस्या से प्रसन्न होकर चंद्र देव को 16 कलाएं प्रदान की थीं। हालांकि, बहुत कम लोग हैं जिन्हें चंद्रमा की 16 कलाओं के नाम पता होंगे। ऐसे में आज हम आपको चंद्रमा की 16 कलाओं के नाम और इनके महत्व के बारे में बताएंगे। 

चंद्रमा की 16 कलाएं

  • अमृता (अमृत): चंद्रमा की इस कला को जीवन देने वाला और अमृत्व का प्रतीक माना जाता है।
  • मानदा (मनदा): इस कला को शीतलता और खुशी देने वाला माना जाता है।  जो मन को प्रसन्नता और शीतलता देती है।
  • पूषा (पुष्प): ऊर्जा और पोषण का प्रतीक इस कला को माना जाता है।  
  • पुष्टि: चंद्रमा की यह कला तन और मन को ताकत देने वाली कला। 
  • तुष्टि: संतुष्टि और मन की शांति देने वाली कला।
  • रति: चंद्र देव की इस कला को आकर्षण और प्रेम का प्रतीक। 
  • धृति: संयम और धैर्य प्रदान करने वाली कला। 
  • शशिनी (शाशनी): प्रकाश और ज्ञान देने वाली कला। 
  • चंद्रिका: चंद्र देव की यह कला शीतलता और कोमलता देने वाली कला। 
  • कान्ति: व्यक्तित्व को चमकाने वाली कला। 
  • ज्योत्स्ना: चंद्रमा की यह कला सकारात्मक ऊर्जा देने वाली कला।
  • श्री: समृद्धि और ऐश्वर्य का प्रतीक। 
  • प्रीति: स्नेह प्रदान करने वाली कला। 
  • अंगदा: यह कला शारीरिक शक्ति देने वाली मानी जाती है। 
  • पूर्णामृता (पूर्ण): परिपूर्णता प्रदान करने वाली कला। 

शरद पूर्णिमा 

शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होते हैं और पृथ्वी के बेहद नजदीक रहते हैं। माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है इसलिए शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में खीर रखी जाती है। अगले दिन इस खीर को खाने से आरोग्य की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही इस खीर का भोग देवी लक्ष्मी को लगाने से घर में सुख-शांति आती है और धन-धान्य की आपको प्राप्ति होती है। शरद पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से भी आपको शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं। वहीं जो लोग आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर हैं और योग-ध्यान करते हैं उन्हें आलौकिक अनुभव शरद पूर्णिमा पर प्राप्त हो सकते हैं। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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