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शारदीय नवरात्रि में हाथी पर सवार होकर आएंगी माता, क्या होगा इसका देश-दुनिया पर प्रभाव? जानें

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Oct 08, 2026 03:35 pm IST,  Updated : Oct 08, 2026 03:56 pm IST

शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है और इस बार माता हाथी पर सवार होकर आ रही है। हाथी पर माता के सवार होकर आने से क्या प्रभाव देखने को मिलते हैं, आइए विस्तार से जानते हैं।

शारदीय नवरात्रि 2026- India TV Hindi
शारदीय नवरात्रि 2026 Image Source : UNSPLASH

शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से होने जा रही है। नवरात्रि के 9 दिनों में हम मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं। इस बार शारदीय नवरात्रि रविवार के दिन से हो रही है इसलिए माता की सवारी हाथी होगी। हिंदू धर्म में हाथी को संपन्नता, जल और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि माता के हाथी पर सवार होकर आने का देश-दुनिया और लोगों के निजी जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा। 

अच्छी वर्षा और फसल 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता का हाथी पर सवार होकर आना अच्छी वर्षा और अच्छी फसल होने का संकेत होता है। इसके साथ ही वातावरण में भी शुद्धता आती है और भक्तों के रोग-दोष भी दूर होते हैं। 

देश-दुनिया में स्थिरता

शारदीय नवरात्रि के दौरान हाथी पर माता के सवार होकर आने से शांति और स्थिरता देश-दुनिया में आ सकती है। वैश्विक स्तर पर जो अशांति का माहौल होता है वो शांत हो सकता है। हाथी पर माता के सवार होकर आने से दुश्मन देशों के बीच भी बातचीत की स्थिति बन सकती है और मैत्रीपूर्ण बातचीत हो सकती है। साथ ही समाज में भी सुख और शांति बनी रहती भाईचारे की भावना फैलती है। 

आर्थिक पक्ष में मजबूती 

माता का हाथी पर बैठकर आना धन, वैभव और समृद्धि का प्रतीक भी है। इसलिए शारदीय नवरात्रि के बाद लोगों के जीवन में भी आर्थिक स्थिरता आ सकती है। शेयर बाजार और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में तेजी आ सकती है। लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं। 

राजनीतिक बदलाव

ज्योतिष की मानें तो माता के हाथी पर सवार होकर आने से देश-दुनिया में राजनीतिक बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं। यह बदलाव सकारात्मक होते हैं। सत्ता और विपक्ष के बीच चल रहा टकराव कम हो सकता है और साथ ही वैश्विक राजनीति में भी स्थिरता देखने को मिल सकती है। 

माता की सवारी से जुड़ा श्लोक

शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमै तुरंगमे।

गुरौशुक्रेच दोलायां बुधे नौकाप्रकीर्तिता॥

इस श्लोक का अर्थ है कि जब नवरात्रि की शुरुआत रवि या सोमवार को होती है तो माता हाथी पर सवार होकर आती हैं। शनि और मंगलवार से नवरात्रि की शुरुआत होती है तो माता तुरंग यानि घोड़े पर सवार होकर आती हैं। बुधवार से नवरात्रि शुरू होती हैं तो माता नौका पर सवार होकर आती हैं। शुक्र और गुरुवार से नवरात्रि की शुरुआत होती है तो माता की सवारी पालकी या डोली होती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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