Saturday, February 14, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. धर्म
  3. Shiv Raksha Stotra PDF: महाशिवरात्रि पर करें शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ, मनोकामनाएं होंगी पूरी और पाएंगे मानसिक शांति

Shiv Raksha Stotra PDF: महाशिवरात्रि पर करें शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ, मनोकामनाएं होंगी पूरी और पाएंगे मानसिक शांति

Written By: Naveen Khantwal Published : Feb 14, 2026 05:48 pm IST, Updated : Feb 14, 2026 05:48 pm IST

Shiv Raksha Stotra PDF: महाशिवरात्रि के पवित्र दिन पर शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है। इस स्तोत्र का पाठ करने से मनोकामनाएं तो पूरी होती ही हैं साथ ही आपको आध्यात्मिक उन्नति भी मिलती है।

Shiv Raksha Stotra - India TV Hindi
Image Source : FREEPIK शिव रक्षा स्तोत्र

Shiv Raksha Stotra PDF: महाशिवरात्रि के दिन शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से दुख, कष्ट और भय से आपको मुक्ति मिलती है। भगवान शिव की कृपा से आपके बिगड़ते काम भी बनने लगते हैं। इसके साथ ही कुंडली में शनि, राहु-केतु जैसे बुरे ग्रहों का प्रभाव भी कम होता है। शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ शाम को की जाने वाली पूजा में आपको महाशिवरात्रि के दिन करना चाहिए। वहीं इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और आध्यात्मिक क्षेत्र में व्यक्ति को बेहद शुभ फल प्राप्त होते हैं। आप भी शिवरात्रि के पावन अवसर पर शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ करके अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। आपको बता दें कि महाशिवरात्रि का पावन त्योहार 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा। 

शिव रक्षा स्तोत्र

विनियोग-

ॐ श्री गणेशाय नम:।

ॐ अस्य श्री शिवरक्षास्तोत्रमंत्रस्य याज्ञवल्क्यऋषिः।।
श्री सदाशिवो देवता। अनुष्टुप छन्दः।। 
श्री सदाशिवप्रीत्यर्थं शिव रक्षा स्तोत्रजपे विनियोगः।।

स्तोत्र पाठ

चरितं देवदेवस्य महादेवस्य पावनम्।

अपारं परमोदारं चतुर्वर्गस्य साधनम्॥1॥

गौरीविनायकोपेतं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रकम्।

शिवं ध्यात्वा दशभुजं शिवरक्षां पठेन्नरः॥2॥

गंगाधरः शिरः पातु भालं अर्धेन्दुशेखरः।

नयने मदनध्वंसी कर्णो सर्पविभूषण॥3॥

घ्राणं पातु पुरारातिः मुखं पातु जगत्पतिः।

जिह्वां वागीश्वरः पातु कंधरां शितिकंधरः॥4॥

श्रीकण्ठः पातु मे कण्ठं स्कन्धौ विश्वधुरन्धरः।

भुजौ भूभारसंहर्ता करौ पातु पिनाकधृक्॥5॥

हृदयं शंकरः पातु जठरं गिरिजापतिः।

नाभिं मृत्युञ्जयः पातु कटी व्याघ्राजिनाम्बरः॥6॥

सक्थिनी पातु दीनार्तशरणागतवत्सलः।

उरू महेश्वरः पातु जानुनी जगदीश्वरः॥7॥

जङ्घे पातु जगत्कर्ता गुल्फौ पातु गणाधिपः।

चरणौ करुणासिंधुः सर्वाङ्गानि सदाशिवः॥8॥

एतां शिवबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्।

स भुक्त्वा सकलान्कामान् शिवसायुज्यमाप्नुयात्॥9॥

ग्रहभूतपिशाचाद्यास्त्रैलोक्ये विचरन्ति ये।

दूरादाशु पलायन्ते शिवनामाभिरक्षणात्॥10॥

अभयङ्करनामेदं कवचं पार्वतीपतेः।

भक्त्या बिभर्ति यः कण्ठे तस्य वश्यं जगत्त्रयम्॥11॥

इमां नारायणः स्वप्ने शिवरक्षां यथाऽऽदिशत्।

प्रातरुत्थाय योगीन्द्रो याज्ञवल्क्यः तथाऽलिखत॥12॥

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। धर्म से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।

Advertisement
Advertisement
Advertisement