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क्या आप भी फेंक देते हैं जलाभिषेक के बाद बचा जल? ये गलती पड़ सकती है भारी, जानिए सही तरीका और धार्मिक मान्यताएं

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Jul 02, 2026 12:02 am IST,  Updated : Jul 02, 2026 12:02 am IST

शिवलिंग के जलाभिशेषक में उपयोग किया गया जल पवित्र हो जाता है, इसलिए इसका सम्मानपूर्वक विसर्जन जरूरी माना गया है। धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार, पूजा के बाद बचा हुआ पवित्र जल फेंकते हैं यहां तो आपका पुण्य टूट सकता है। जानिए सही तरीका वरना हो सकती है हानि।

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शिवलिंग जलाभिषेक और पूजा नियम Image Source : PINTEREST

सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध, गंगाजल, बेलपत्रआदि अर्पित कर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जलाभिषेक के बाद बचा हुआ पवित्र जल आखिर कहां डालना चाहिए। इसे सामान्य पानी की तरह कहीं भी फेंकना सही नहीं होता। जलाभिषेक के बाद बचा जल कहां डालना है शुभ? जानिए वास्तु और धार्मिक मान्यताएं क्या कहती हैं। 

कहां डालें बचा हुआ जल

वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जलाभिषेक के बाद बचा हुआ जल किसी स्वच्छ पौधे या तुलसी के पौधे की जड़ों में अर्पित किया जा सकता है। अगर आपके घर में बगीचा या हरियाली है तो वहां भी इस जल का उपयोग किया जा सकता है। इसे प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है और इससे सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

इन जगहों पर डालना वर्जित

मान्यताओं के अनुसार, पूजा के बाद बचा हुआ जल नाली, शौचालय या किसी गंदी जगह पर नहीं डालना चाहिए। ऐसा करना अपवित्रता और पवित्र जल का अपमान माना जाता है और पूजा के प्रभाव को कम करने वाला बताया जाता है। इसलिए हमेशा इसे स्वच्छ स्थान पर ही विसर्जित करने की सलाह दी जाती है।

गंगाजल होने पर क्या करें

अगर जलाभिषेक में गंगाजल का उपयोग किया गया हो, तो उसे किसी नदी या तालाब जैसे स्वच्छ जल स्रोत में प्रवाहित करना सबसे शुभ माना जाता है। अगर यह संभव न हो तो घर के किसी पौधे में इसे अर्पित करना भी एक उचित विकल्प माना जाता है।

सावन में घर की साफ-सफाई का महत्व

सावन के दौरान केवल पूजा ही नहीं, बल्कि घर के मंदिर की स्वच्छता का भी विशेष महत्व बताया गया है। इस महीने पूजा स्थल को साफ और पवित्र रखना शुभ माना जाता है। साथ ही उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ बताया गया है। मान्यता है कि इस दिशा में भगवान शिव या उनके परिवार की तस्वीर रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक शांति बनी रहती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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