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भगवान श्रीकृष्ण मुकुट में क्यों लगाते हैं मोरपंख? जानिए इसके पीछे छिपा धार्मिक और आध्यात्मिक रहस्य

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Jul 23, 2026 12:05 am IST,  Updated : Jul 23, 2026 12:05 am IST

भगवान श्रीकृष्ण के मनमोहक स्वरूप में मोरपंख का विशेष महत्व है। बांसुरी और पीतांबर के साथ उनके मुकुट में सजा मोरपंख उनकी पहचान का अहम हिस्सा है। यह केवल सजावट नहीं, बल्कि प्रेम, प्रकृति और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है। जानिए भगवान श्रीकृष्ण मुकुट में मोरपंख क्यों लगाते हैं।

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भगवान श्रीकृष्ण मुकुट में क्यों लगाते हैं मोरपंख? Image Source : PINTEREST

भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर देखते ही सबसे पहले उनका मनमोहक स्वरूप ध्यान आकर्षित करता है। सिर पर मुकुट, उसमें लगा मोरपंख, हाथों में बांसुरी और पीतांबर धारण किए हुए श्रीकृष्ण का रूप भक्तों के मन में विशेष स्थान रखता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मुकुट में मोरपंख को ही क्यों स्थान दिया? धार्मिक मान्यताओं में इसके पीछे कई आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक अर्थ बताए गए हैं। तो चलिए जानते हैं क्यों श्रीकृष्ण ने मोरपंख को अपने मुकुट पर धारण किया है और इसका क्या महत्व बताया जाता है। 

प्रकृति प्रेम का प्रतीक

भगवान श्रीकृष्ण प्रकृति से बेहद प्रेम करते थे। वहीं, वृंदावन के जंगलों में मोर उनके प्रिय पक्षियों में शामिल माने जाते हैं। धर्म ग्रंथों में वर्णित है कि श्रीकृष्ण की बांसुरी की धुन सभी को अपनी ओर आकर्षित कर लेती थी। कहा जाता है कि जब श्रीकृष्ण अपनी मधुर बांसुरी बजाते थे, तो मोर आनंद में झूमकर नृत्य करने लगते थे। नृत्य के बाद जो मोरपंख धरती पर गिर जाते थे, उन्हें श्रीकृष्ण प्रेम से अपने मुकुट में धारण कर लेते थे। माना जाता है कि इस तरह से मोरपंख उनका अभिन्न हिस्सा बन गया। वहीं, मोरपंख को उनके प्रकृति प्रेम और जीवों के प्रति स्नेह का प्रतीक भी माना जाता है।

सादगी का संदेश

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मुकुट में सोने, हीरे या महंगे रत्नों के बजाय साधारण मोरपंख को महत्व दिया। इसके पीछे संदेश माना जाता है कि असली महानता बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि सरलता, प्रेम और विनम्रता में होती है।

आध्यात्मिक महत्व

मोरपंख सकारात्मक ऊर्जा और शुभता का प्रतीक है। इसके सुंदर रंग जीवन में संतुलन, शांति और आनंद का संदेश देते हैं। इसे नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला भी माना गया है। इसी वजह से कई लोग अपने पूजा स्थल पर मोरपंख रखते हैं।

मोरपंख का धार्मिक महत्व

इसे भगवान श्रीकृष्ण और राधा जी के दिव्य प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इसमें प्रेम, समर्पण और पवित्रता की भावना जुड़ी है। यही कारण है कि जन्माष्टमी और कृष्ण से जुड़े अन्य उत्सवों में मोरपंख का विशेष महत्व होता है।

प्रकृति संरक्षण का संदेश

श्रीकृष्ण का मुकुट में मोरपंख धारण करना इस बात का प्रतीक माना जाता है कि हमें पशु-पक्षियों और प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान करना चाहिए। यह प्रेम, करुणा और पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा देता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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