Shukra Pradosh Vrat Katha: 12 जून को शुक्र प्रदोष व्रत है। इस व्रत का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। कहते हैं जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से ये व्रत रखता है उसके जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती है। ये व्रत मनुष्य को उसके सभी पापों से मुक्ति दिलाता है। इस व्रत में प्रदोष काल में भगवान शिव की विधि विधान पूजा करने के साथ-साथ प्रदोष की पावन कथा भी सुनी जाती है। चलिए आपको बताते हैं शुक्र प्रदोष व्रत की कथा और शुभ मुहूर्त।
शुक्र प्रदोष व्रत कथा मुहूर्त: 12 जून 2026
12 जून को शुक्र प्रदोष व्रत की कथा पढ़ने का शुभ मुहूर्त शाम 07:36 से रात 09:20 बजे तक रहेगा। त्रयोदशी तिथि 12 जून की शाम 07:36 से 13 जून की शाम 04:07 बजे तक रहेगी।
शुक्र प्रदोष व्रत कथा
एक समय की बात है, एक नगर में तीन घनिष्ठ दोस्त रहते थे। तीनों का ही विवाह हो चुका था, लेकिन उनमें से एक मित्र का गौना होना अभी बाकी था। एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों पर चर्चा कर रहे थे। एक मित्र ने महिलाओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि बिना स्त्री के घर में भूतों का डेरा होता है। ये बात सुनने के बाद उस मित्र ने अपनी पत्नी को घर लाने का निश्चय किया जिसका अभी गौना नहीं हुआ था। लेकिन जिस समय उसने ये निर्णय लिया उस समय शुक्र तारा डूबा हुआ था। जिसके चलते लड़के के माता-पिता ने बहू को विदा कराकर लाने से मना कर दिया।
लेकिन इसके बाद भी उस लड़के ने किसी की नहीं सुनी और वो सीधे अपने ससुराल पहुंच गया। ससुराल वालों ने भी अपने दामाद को समझाने की पूरी कोशिश की लेकिन उसने उनकी भी नहीं सुनी और उसने जबरदस्ती अपनी पत्नी की विदाई करा ली। दोनों पति-पत्नी बैलगाड़ी पर बैठकर अपने घर के लिए निकल पड़े। लेकिन रास्ते में एक बैल की टांग टूट गई, जिससे दोनों को खूब चोटें आईं। लेकिन फिर भी वे आगे बढ़ते रहे। कुछ देर बाद उन्हें डाकुओं ने घेर लिया और उनका सारा धन लूट ले गए। दुखी मन से दोनों पति-पत्नी अपने घर पहुंचे। लेकिन वहां पहुंचते ही लड़के को सांप ने डंस लिया।
उपचार के लिए वैद्य को बुलाया गया। उसने बताया कि अब इस लड़के के पास तीन दिन ही बचे हैं। इसके बाद उस लड़के का मित्र उससे मिलने आया। मित्र ने उसके माता-पिता को सलाह दी कि आप दोनों शुक्र प्रदोष व्रत रखिए और अपने बेटे को पत्नी सहित ससुराल वापस भेज दीजिए। ये सारी बाधाएं इसलिए ही आई हैं क्योंकि आपका पुत्र शुक्र डूबने पर अपनी पत्नी को विदा कराकर ले आया था। ऐसे में अगर वो वहां वापस पहुंच जाता है तो उसकी जान बच जाएगी। लड़के के माता-पिता ने ऐसा ही किया। इसके बाद लड़के की हालत ठीक होने लगी। शुक्र प्रदोष व्रत को करने से उनके जीवन के सारे कष्ट दूर हो गए। बोलो उमापति शंकर भगवान की जय।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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