फ्रांस में शिक्षा क्षेत्र के लिए ज्यादा फंड की मांग को लेकर स्कूली छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। कई जगहों पर ये प्रदर्शन हिंसक भी हो गया है। मंगलवार को छात्रों के समर्थन में पूरे फ्रांस में 2.5 लाख से अधिक लोगों ने प्रदर्शन किया है। पेरिस और अन्य शहरों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे। अब इस प्रदर्शन पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी बयान सामने आया है। ट्रंप ने इस प्रदर्शन को मजहबी उन्माद का नतीजा बताया है। ट्रंप ने कहा है कि फ्रांस में जो हो रहा है उसका स्कूलों से स्टूडेंट्स से कोई लेना देना नहीं है, हकीकत ये है कि इस्लाम अब फ्रांस पर कब्जा करना चाहता है। ये सब उसी साजिश का हिस्सा है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, फ्रांस की सड़कों पर छात्रों का कब्जा है। स्कूल, होटल और सरकारी जगहों को आग के हवाले किया जा रहा है। सुरक्षाबलों के लिए सिचुएशन को कंट्रोल कर पाना अब बहुत मुश्किल हो गया है। इस प्रोटेस्ट की शुरुआत पेरिस के एक रूरल इलाके से हुई थी लेकिन ये आग अब पूरे फ्रांस में फैल गई है। ढाई लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उत्पात मचा रहे हैं। पहले ये सिर्फ स्कूल के स्टूडेंट्स का प्रोटेस्ट था। लेकिन अब इसमें टीचर्स, कॉलेज स्टूडेंट्स और पैरेंट्स भी शामिल हो गए हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?
फ्रांस में जारी प्रदर्शन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट किया है और इसे अवैध घुसपैठ और जनसंख्या के असंतुलन से जोड़ा है। ट्रंप ने कहा- "फ्रांस में जो हो रहा है, वह बेकाबू और बड़े पैमाने पर हो रहे पलायन के नतीजे से कम नहीं है। यह स्कूलों के बारे में नहीं है, बल्कि यह इस्लाम के उस देश पर कब्जा करने की कोशिश के बारे में है जो कभी महान हुआ करता था।" बता दें कि इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर भी बड़ा बयान जारी किया था। ट्रंप ने कहा था कि ईरान बर्बाद हो गया है और उसके पास तेल, इकोनॉमी कुछ भी नहीं बचा है।
कई शहरों में बड़े पैमाने पर हिंसा
फ्रांस के मार्से, नांत, टूलूज, स्ट्रासबर्ग, लियोन और रेनेस में बड़े पैमाने पर हिंसा हो रही है, आग लगाई जा रही है। इस दौरान पुलिस लाठीचार्ज कर रही है, टीयर गैस के सेल्स फायर किए जा रहे हैं, लेकिन हालात बेकाबू हैं। प्रदर्शन और हिंसा को देखते हुए सरकार ने 2 हजार से ज्यादा स्कूल बंद कर दिए हैं। 1 हजार से ज्यादा स्कूलों को ऑनलाइन क्लासेज चलानी पड़ रही हैं। सरकार प्रदर्शनकारियों से बात करना चाहती है लेकिन वो बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं।
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