वास्तु शास्त्र और फेंगशुई में घर की सजावट से जुड़ी कई ऐसी चीजें बताई गई हैं, जिन्हें पॉजिटिविटी और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इनमें दौड़ते हुए घोड़ों की प्रतिमा और हाथी की मूर्ति भी हैं। हालांकि, दोनों को लेकर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि घर में दौड़ता हुआ घोड़ा लगाएं या हाथी की मूर्ति। वास्तु अनुसार दोनों के फायदे अलग-अलग होते हैं और इन्हें अपनी जरूरत के अनुसार चुनना बेहतर माना जाता है। तो चलिए जानते हैं दोनों से जुड़े वास्तु नियम और लाभ।
दौड़ता हुआ घोड़ा: सफलता का प्रतीक
वास्तु शास्त्र और फेंगशुई में दौड़ते हुए घोड़े ऊर्जा, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की प्रेरणा का प्रतीक माने जाते हैं। इन्हें घर या ऑफिस में रखने से करियर, व्यापार और पढ़ाई में बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद बढ़ती है। इसी कारण नौकरीपेशा लोगों, कारोबारियों और छात्रों के बीच इसकी खास लोकप्रियता है।
ऐसे रखें घोड़ों की प्रतिमा
वास्तु में 7 दौड़ते हुए घोड़ों की पेंटिंग या मूर्ति को सबसे शुभ माना जाता है। ध्यान रखें कि घोड़ों का मुख घर के अंदर की ओर हो, ताकि सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करे। गलत दिशा में रखी गई प्रतिमा का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता।
हाथी की मूर्ति: स्थिरता और सुरक्षा
वास्तु शास्त्र में हाथी की मूर्ति शक्ति, बुद्धिमत्ता और सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती है। इसे घर में रखने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है, आर्थिक स्थिति में स्थिरता आने की मान्यता है। परिवार की खुशहाली और सुरक्षा के लिए इसे शुभ माना जाता है।
हाथी रखने के वास्तु नियम
वास्तु में ऊपर उठी हुई सूंड वाला हाथी शुभ संकेत माना जाता है। कहते हैं कि यह धन और सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित करता है। वहीं, जोड़े में रखे गए हाथी या सूंड मिलाते हुए हाथियों की मूर्ति परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम, सामंजस्य और आपसी विश्वास बढ़ाने का प्रतीक मानी जाती है।
किसे चुनना रहेगा बेहतर?
दौड़ते हुए घोड़े और हाथी की मूर्ति, दोनों का महत्व अलग-अलग माना गया है। अगर आपका लक्ष्य करियर, व्यापार में तरक्की हासिल करना है तो दौड़ते हुए घोड़े की मूर्ति बेहतर और परफेक्ट ऑप्शन है। अगर आप घर में शांति, आर्थिक स्थिरता और सकारात्मक माहौल चाहते हैं तो हाथी की मूर्ति रखना बेहतर विकल्प है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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