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लिंबाराम ने 43 के उम्र में चुना हमसफर

 Written By: India TV Sports Desk
 Published : Jun 20, 2015 06:22 pm IST,  Updated : Jun 20, 2015 06:22 pm IST

नई दिल्ली: भारत के मशहूर तीरंदाज और टीम इंडिया के पूर्व कोच रह चुके लिंबाराम ने 43 साल की उम्र में अपना जीवन साथी चुन लिया है। लिंबाराम ने असम के नार्थ चंपापुरी गांव बंगोई

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लिंबाराम ने 43 के उम्र में चुना हमसफर

नई दिल्ली: भारत के मशहूर तीरंदाज और टीम इंडिया के पूर्व कोच रह चुके लिंबाराम ने 43 साल की उम्र में अपना जीवन साथी चुन लिया है। लिंबाराम ने असम के नार्थ चंपापुरी गांव बंगोई की निवासी 33 साल की जैनी डायमरी से जो कि एक एनजीओ में कार्यरत है उनके साथ डूंगरपुर प्रतापगढ़ में कोर्ट मैरिज कर ली। लिंबाराम की जैनी से पहली मुलाकात जनवरी में प्रतापगढ़ में हुए राज्य स्तरीय जनजाती खेल प्रतियोगिता के दौरान हुई थी।

शादी के बार में सोचा न था जैनी ने कैसे जीता दिल-

लिंबाराम ने बताया कि शादी के बारे में उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था। लेकिन जब उन्होंने जैनी की समाज सेवा करने की भावना और बच्चों के प्रति लगाव देखा तो वो अपना निर्णय बदलने पर मजबूर हो गयें। इसके बाद जैनी से दोस्ती हुई और लगातार इनकी आपस में  बातचीत होती रही। फिर इस दोस्ती को इन्होंने शादी के मुकाम पर पहुंचाया।

कैसे बना रिश्ता-
लिंबाराम के अनुसार उनकी पहली मुलाकात प्रतापगढ़ में हुए एक राज्य स्तरीय जनजाती खेल प्रतियोगिता के समय हुई थी इस खेल कार्यक्रम के लिंबाराम आयोजक सचिव थे। समाजसेवी और बच्चों से जैनी का भी खूब लगाव रहता था इसलिए इस कार्यक्रम में जैनी भी उपस्थित थी। जैनी ने उनके साथ एक फोटों खिंचवाई थी। और लिंबाराम के संस्था की ओर से बच्चों के लिए किये जा रहे कार्यो की तारीफ भी की थी। इस दौरान जैनी लिंबाराम से कॉफी प्रभावित हुई थी। उसके बाद दोनों में फोन पर भी बातें चलने लगी। फिर मई में जैनी ने लिंबाराम से कहा कि उनका वर्ल्ड विजन संस्थान में कान्ट्रैक्ट खत्म हो रहा है। और वह वापस जा रही है। उसी समय जैनी ने उनसे शादी करने का प्रस्ताव रख दिया था। लिंबाराम भी उनसे कॉफी प्रभावित थे इसलिए उन्होंने भी उनके प्रस्ताव को मान लिया और दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली।

लिंबाराम की उपलब्धियां-

लिंबाराम एक अंतर्राष्ट्रीय तीरंदाजी खिलाड़ी रह चुके हैं और ये टीम इंडिया को कोच के तौर पर कोंचिग भी दे चुके है। इन्होंने टीम इंडिया का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व किया है। जिसमें 3 ओलंपकि भी शामिल है। लिंबाराम ने सन् 1992 में बीजिंग में हुए एशियन कप में तीरंदाजी वर्ल्ड कप में बराबरी भी की थी। 10 जनवरी 2009 में भारतीय तीरंदाजी संघ ने लिंबाराम को 2010 के कॉमनवेल्थ (राष्ट्रमंडल खेल) के लिए कोच के तौर पर चुना था।

लिंबाराम को 1991 में अर्जुन अवार्ड और 2012 पदम श्री अवार्ड से नवाजा गया है।

 

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