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सिम स्वैपिंग का खतरा लगातार बढ़ रहा, कैसे स्कैमर्स देते हैं अंजाम और कैसे बचें इस रिस्क से-जानें टिप्स

 Published : Apr 23, 2026 09:41 am IST,  Updated : Apr 23, 2026 09:41 am IST

सिम स्वैपिंग का खतरा ऐसा है जो ना सिर्फ आपके फोन पर कंट्रोल हासिल कर लेता है बल्कि आपकी सारी प्राइवेट और वित्तीय जानकारी को भी जोखिम के दायरे में ले आता है।

SIM Swapping- India TV Hindi
सिम स्वैपिंग से कैसे बचें Image Source : FREEPIK

SIM Swapping Fraud: सिम स्वैप का खतरा डिजिटल युग में बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा है और आपके पैसे और दूसरा निजी डेटा चुराने के लिए आपका मोबाइल नंबर ही इसका जरिया बन सकता है। इस सिम स्वैप के जरिए स्कैमर आपके पढ़े जाने वाले मैसेज या यहां तक ​​कि आपके किए गए कॉल को कंट्रोल करने में लग जाते हैं। इस स्तर का हमला तभी संभव है जब वे आपके फोन पर चल रहे सिम कार्ड की नकल कर सकते हैं और एक क्लोन बना सकते हैं जो उनके डिवाइस पर काम करता है। सिम स्वैपिंग किसी भी तरह से कोई नया घोटाला नहीं है लेकिन लोग अपने फोन पर जो डेटा रखते हैं उसको हासिल करने के लिए स्कैमर्स कई तरह के हथकंडे अपनाते हैं और एक बार सिम का डुप्लीकेट हासिल करने के बाद आपके फोन की जरूरी जानकारी का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं।

यहां सिम स्वैप धोखाधड़ी के बारे में सभी डिटेल्स दी गई हैं जैसे कि ये हमले कैसे किए जाते हैं और खुद को कैसे सेफ रखा जा सकता है-

क्या है सिम स्वैप अटैक 

सिम स्वैप स्कैमर्स आपका पर्सनल डेटा हासिल करना चाहते हैं। इसका यूज वे मोबाइल नेटवर्क में किसी के साथ मिलकर कर सकते हैं। डुप्लीकेट सिम कार्ड हासिल करने के बाद वो आपके पते का डिटेल, आधार कार्ड की जानकारी जानने के बाद आपके डेटा तक पहुंच हासिल कर लेते हैं और इसे एक्जीक्यूट करने लग जाते हैं। इसके लिए सबसे पहले स्कैमर्स किसी सहायता एजेंट, कूरियर डिलीवरी पर्सन या कोई दूसरा व्यक्ति आपका पता पूछने और आपकी पहचान साझा करने के लिए आपसे कॉन्टेक्ट कर सकता है। 

इसके बाद वे आपको फिशिंग लिंक भेज सकते हैं या आपसे रैंडम ऐप्स इंस्टॉल करने के लिए कह सकते हैं। हालांकि ऐसा केवल कुछ मामलों में ही होता है। ज्यादातर बार कुछ कॉल ही यूजर्स का डेटा इकट्ठा करने और उसके बेस पर डुप्लीकेट सिम कार्ड जारी करने के लिए काफी हो सकते हैं। अपराधी सिम स्वैप करने के लिए आपके नाम, डेट ऑफ बर्थ और एड्रेस जैसी जानकारी लेकर करके टेलीकॉम ऑपरेटर को धोखा देते हैं।

जब स्कैमर्स के पास पर्याप्त जानकारी होती है तो वे आपके मोबाइल ऑपरेटर के कस्टमर केयर से संपर्क करते हैं। वे आप बनकर बात करते हैं और दावा करते हैं कि या तो मेरा सिम कार्ड खो गया है, मेरा सिम डैमेज हो गया है, मुझे नया सिम एक्टिवेट करवाना है। इसके बाद वे आपकी चोरी की गई जानकारी का इस्तेमाल करके खुद को असली मालिक साबित कर देते हैं और कंपनी को इस बात पर राजी कर लेते हैं कि वे आपके नंबर को उनके पास मौजूद एक नये सिम कार्ड पर ट्रांसफर (पोर्ट) कर दें।

जैसे ही टेलीकॉम कंपनी स्कैमर के पास मौजूद सिम को एक्टिवेट करती है तो आपका सिम बंद हो जाता है और आपके फोन के सिग्नल चले जाते हैं। इसके बाद सारे कॉल्स और SMS स्कैमर के पास जाते हैं जिसके बाद वो आपके बैंक अकाउंट, ईमेल और सोशल मीडिया के OTP हासिल कर सकते हैं।

सिम स्वैप का शिकार बनने से कैसे बचें 

  1. सिम स्वैप धोखाधड़ी से सुरक्षित रहने के लिए, कभी भी पते, आधार नंबर, या अपने पैन जैसे किसी अन्य संवेदनशील डेटा का खुलासा न करें जिसका उपयोग किसी टेलीकॉम ऑपरेटर को समझाने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा, आप अपनी सुरक्षा के लिए सिम लॉकिंग भी यूज कर सकते हैं।
  2. ज्यादातर लोग अपने फोन पर लॉक रखते हैं, लेकिन सिम पर नहीं। अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर SIM PIN सेट करें। इससे फायदा यह होगा कि यदि कोई आपका सिम दूसरे फोन में डालेगा, तो उसे पहले वह PIN डालना होगा।
  3. गलत PIN डालने पर सिम लॉक हो जाएगा और स्कैमर उसका इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। 
  4. सिर्फ SMS आधारित OTP पर निर्भर न रहें। अपराधी सिम स्वैप करके आपका SMS देख सकते हैं। गूगल ऑथेंटिकेटर या माइक्रोसॉफ्ट ऑथेंटिकेटर जैसे ऐप्स का इस्तेमाल करें। ये सिम कार्ड की बजाए आपके फोन के हार्डवेयर से जुड़े होते हैं। अगर मुमकिन हो तो YubiKey जैसी फिजिकल सिक्योरिटी कीज को यूज करें। 
  5. सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी (खासकर फोन नंबर और ईमेल) पब्लिक न करें।
  6. अनजान लिंक पर क्लिक न करें क्योंकि इनसे आपकी पहचान चुराई जा सकती है।
  7. अगर आपका मोबाइल नेटवर्क अचानक गायब हो जाए और लंबे समय तक 'No Service' दिखाए तो तुरंत दूसरे फोन से अपने कस्टमर केयर को कॉल करें और पूछें कि क्या आपके नंबर पर सिम एक्सचेंज की रिक्वेस्ट आई है।
  8. अगर आपके पास सिम बदलने का कोई अनजान SMS या ईमेल आए तो तुरंत एक्शन लें।
  9. अपने बैंक अकाउंट में ईमेल अलर्ट्स भी चालू रखें। यदि सिम बंद हो जाता है तो आपको ईमेल के जरिए असामान्य लेनदेन की जानकारी मिल जाएगी।
  10. अपने बैंक और महत्वपूर्ण अकाउंट्स के लिए एक अलग प्राइवेट ईमेल आईडी रखें जो पब्लिक रूप से कहीं भी इस्तेमाल न की गई हो।

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