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उत्तर प्रदेश में 41 फर्जी डॉक्टर पकड़े गए, लिस्ट भी सामने आई, बोर्ड ने लखनऊ पुलिस को तहरीर दी

 Reported By: Ruchi Kumar Written By: Rituraj Tripathi
 Published : Aug 25, 2026 04:25 pm IST,  Updated : Aug 25, 2026 05:31 pm IST

यूपी में 41 फर्जी डॉक्टर पकड़े गए हैं जो लंबे समय से प्रैक्टिस भी कर रहे थे। इन्होंने फर्जी कागजों के जरिए रजिस्ट्रेशन करवा रखा था।

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यूपी में 41 फर्जी डॉक्टर पकड़े गए Image Source : INDIA TV

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 41 फर्जी डॉक्टर पकड़े गए हैं। ये सभी आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं और फर्जी डिग्री से आयुर्वेदिक तथा यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड में रजिस्ट्रेशन करवाकर प्रैक्टिस कर रहे थे। बोर्ड ने लखनऊ पुलिस को इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए तहरीर दी है। 

पिछले 15 साल से रजिस्टर्ड डॉक्टरों की डिग्री जांच करने के भी आदेश

बोर्ड ने पिछले 15 साल से रजिस्टर्ड डॉक्टरों की डिग्री जांच करने के भी आदेश दिए हैं। जिन 41 डॉक्टरों पर FIR के आदेश हुए हैं उनकी अब तक की जांच में बोर्ड को पता चला है कि इन 41 के पास अलग-अलग जगहों से जाली BAMS की डिग्री, फर्जी मार्कशीट्स, इंटर्नशिप सर्टिफिकेट और भारतीय चिकित्सा परिषद हरियाणा के नाम पर जाली NOC है और इन जाली कागजातों से इन्होंने रजिस्ट्रेशन करा रखा है।

दरअसल यूनानी और आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सरकार के आयुष विभाग का आयुर्वेदिक और यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड में रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इन सभी ने अपनी मार्कशीट, डिग्री और दूसरे डाक्यूमेंट्स से बोर्ड में रजिस्ट्रेशन कराया। 

बोर्ड ने इन सभी डाक्यूमेंट्स को वेरीफाई भी किया। इनकी जब शिकायत हुई और जांच कराई गई तो यूनिवर्सिटी ने इन डिग्री को फर्जी बताया। अब बोर्ड ने पुलिस को तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने को कहा है। 

योगी सरकार के मंत्री का सामने आया बयान

योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर का इस मामले में बयान सामने आया है। उन्होंने कहा, "अखिलेश सरकार में बड़े पैमाने पर फर्जी डिग्रियां बांटी गईं लेकिन अब सरकार सभी फर्जी डिग्री की जांच करा रही है।"

एमपी में भी सामने आया था फर्जी डिग्री के सहारे सरकारी नौकरी वाले गिरोह का मामला

मध्य प्रदेश में भी फर्जी MBBS डिग्री के सहारे सरकारी नौकरी पाने वाले बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ था और 3 फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार किए गए थे। फर्जीवाड़े का ये मामला नेशनल हेल्थ मिशन के संजीवनी क्लीनिकों में सामने आया था।

जिस गिरोह के बारे में जानकारी मिली थी, वह डॉक्टरों की फर्जी डिग्री और मेडिकल काउंसिल का नकली रजिस्ट्रेशन नंबर तैयार करवाता था। इस मामले का भंडाफोड़ तब हुआ था, जब दमोह के CHMO को शिकायतें मिलीं। इसके बाद नेशनल हेल्थ मिशन के तहत संजीवनी क्लीनिकों में फर्जीवाड़े की जांच करवाई गई तो धीरे-धीरे सारा सच सामने आ गया।

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