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वाराणसी में गंगा नदी में नावों के संचालन पर तत्काल प्रभाव से लगी रोक, सरकार ने लिया अहम फैसला

 Reported By: Ruchi Kumar Written By: Amar Deep
 Published : Aug 16, 2026 09:12 pm IST,  Updated : Aug 16, 2026 09:12 pm IST

गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने नावों के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। प्रशासन ने अगले आदेश तक नावों का संचालन न करने की सलाह दी है।

बढ़ते जलस्तर को देखते हुए रोका गया नावों का संचालन।- India TV Hindi
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए रोका गया नावों का संचालन। Image Source : INDIA TV

वाराणसी: इन दिनों गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इस वजह से प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक गंगा में नावों के संचालन पर रोक लगा दी है। इस संबंध में, दशाश्वमेध के ACP डॉ. अतुल अंजन त्रिपाठी ने बताया कि जल पुलिस के अनुसार, शनिवार सुबह गंगा का जलस्तर 64.70 मीटर दर्ज किया गया और यह स्तर लगभग 6 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से बढ़ रहा है।

गंगा में बढ़ रहा है जलस्तर

बताया गया कि लगातार बढ़ते जलस्तर और मौजूदा हालात को देखते हुए यह फैसला लिया गया। नदी के जलस्तर और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और हालात सामान्य होने पर नावों के संचालन को फिर से शुरू करने के बारे में अलग से सूचना जारी की जाएगी। फिलहाल वॉटर पुलिस ने सभी नाविकों और संबंधित लोगों से सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की है। यात्रियों की सुरक्षा को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता देते हुए घाटों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से गहरे पानी में न जाने का आग्रह किया है।

सरकार ने बाढ़ संभावित क्षेत्र की बदली परिभाषा

इससे पहले केंद्र सरकार ने गंगा और उसकी सहायक नदियों के 'सक्रिय बाढ़ संभावित क्षेत्र' को फिर से परिभाषित किया। सरकार ने बाढ़ के लौटने की अवधि (रिटर्न पीरियड) के आधार पर नियामक और चेतावनी क्षेत्र बनाए हैं। जल शक्ति मंत्रालय ने 7 अगस्त को जारी और 10 अगस्त को राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के जरिए, 'गंगा नदी (पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016' में संशोधन किया है। 

ताजा संशोधन में 'निर्माण-मुक्त क्षेत्र' शब्द को हटा दिया गया है। इसके बजाय, इसमें कहा गया है कि गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारों और उनके बाढ़ संभावित क्षेत्र का रखरखाव इस तरह किया जाएगा कि प्रदूषण के स्रोतों और दबावों को कम किया जा सके, और जरूरी उपायों के जरिए उनके प्राकृतिक भूजल संचय कार्यों को सुरक्षित रखा जा सके। साथ ही, सरकार ने 'सक्रिय बाढ़ संभावित क्षेत्र' की एक खास परिभाषा तय की है। इसका मतलब है गंगा या उसकी सहायक नदियों का वह इलाका जो हर पांच साल में एक बार आने वाली बाढ़ के दौरान पानी में डूब जाता है।

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