1. Hindi News
  2. उत्तर प्रदेश
  3. फर्जी बीमा पॉलिसियों के जरिए 40 लाख की साइबर ठगी, गाजियाबाद में 7 आरोपी गिरफ्तार

फर्जी बीमा पॉलिसियों के जरिए 40 लाख की साइबर ठगी, गाजियाबाद में 7 आरोपी गिरफ्तार

 Written By: India TV UP Bureau Desk
 Published : Oct 09, 2026 05:04 pm IST,  Updated : Oct 09, 2026 05:05 pm IST

यूपी की गाजियाबाद में पुलिस ने साइबर ठगी करने वाले एक गिरोह का खुलासा किया है। पता चला है कि ये गिरोह फर्जी बीमा पॉलिसियां देकर लोगों को ठगने का काम करता था। उन पर कई जगह पहले से ही मुकदमा दर्ज हैं।

Ghaziabad police have succeeded in nabbing cyber fraudsters.- India TV Hindi
गाजियाबाद पुलिस ने साइबर ठगों को ​पकड़ने में कामयाबी हासिल की है Image Source : REPORTER INPUT

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम थाना गाजियाबाद की ज्वाइंट टीम ने फर्जी बीमा पॉलिसी और  Google Ads के जरिए लोगों को ठगने वाले 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार इस गिरोह ने अब तक 40 लाख रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम नीरज भाटी, नीरज सोलंकी, विक्रम सिंह, नितिन, सुशील कुमार, राहुल कुमार और विक्रांत सिंह हैं। पुलिस ने इनके पास से 4 मोबाइल फोन, 2 एटीएम/डेबिट कार्ड, 2 चेकबुक, एक पासबुक और 3000 रुपये नकद बरामद किए हैं।

डासना जेल में बनी थी गिरोह की योजना

पूछताछ में पता चला है कि इस गिरोह का सरगना दीपक खन्ना उर्फ डीजे है, जो मूल रूप से गाजियाबाद का रहने वाला है और इस वक्त उत्तराखंड में रह रहा है। दीपक खन्ना और राहुल की मुलाकात गाजियाबाद की डासना जेल में हुई थी। जेल से छूटने के बाद ही दोनों ने मिलकर साइबर ठगी का यह धंधा शुरू किया।

कॉल सेंटर के अनुभव का किया इस्तेमाल

नीरज भाटी, नीरज सोलंकी और विक्रांत पहले दिल्ली के एक कॉल सेंटर में काम करते थे। वहीं से उन्होंने बीमा पॉलिसी के नाम पर धोखाधड़ी करने के तरीके सीखे। जब पुलिस ने उस कॉल सेंटर पर छापा मारा तो ये तीनों वहां से फरार हो गए। बाद में राहुल के जरिए वे दीपक खन्ना के संपर्क में आए।

इस तरह करते थे ठगी

यह गिरोह फर्जी ईमेल आईडी बनाकर और एक नामी इंश्योरेंस के नाम पर फर्जी गूगल विज्ञापन देकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था। विज्ञापनों में दिए गए नंबरों पर कॉल करने वालों को पॉलिसी नवीनीकरण (renewal) पर भारी छूट का लालच दिया जाता था। पैसे अकाउंट में ट्रांसफर होने के बाद वे फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करते थे और उसे ग्राहकों को ईमेल कर देते थे।

खाते खुलवाने के लिए कमीशन का खेल

आरोपी विक्रम सिंह उर्फ विक्की ने पूछताछ में बताया कि वह लालच देकर अन्य लोगों के बैंक खाते खुलवाता था और उनकी जानकारी दीपक खन्ना को देता था। इसके बदले उसे ठगी की रकम का 5 प्रतिशत कमीशन मिलता था। इसके अलावा खाताधारक को भी 5% कमीशन दिया जाता था। विक्की ने अपने खातों के अलावा सुशील और नितिन के कुल 6 खाते दीपक को उपलब्ध कराए थे।

कई राज्यों में दर्ज हैं शिकायतें

पुलिस के अनुसार यह गिरोह पिछले 4 महीनों से सक्रिय था। एनसीआरपी (NCRP) पोर्टल पर इस गिरोह के खिलाफ केरल, झारखंड आदि राज्यों से साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतें दर्ज हैं। अकेले नीरज भाटी के मोबाइल नंबर के खिलाफ केरल में कई शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य लोगों, बैंक खातों और लेन-देन की गहन जांच कर रही है। गिरोह के सरगना दीपक खन्ना उर्फ डीजे की तलाश जारी है।

गाजियाबाद से जुबैर अख्तर की रिपोर्ट 

यह भी पढ़ें 

बरेली में सियासी हलचल, बीजेपी छोड़ने के बाद सपा नेताओं संग दिखे पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप

नाबालिग से दुष्कर्म, गर्भवती होने पर कराया गर्भपात, कानपुर की छात्रा के साथ कन्नौज में दरिंदगी का आरोप

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। उत्तर प्रदेश से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।