1. Hindi News
  2. उत्तर प्रदेश
  3. बेटे की जान बचाने को जमीन गिरवी रखी, ₹47,800 का बिल चुकाया... पर तुषार ने तोड़ दिया दम, रैपिड स्टेशन के पास एक्सीडेंट में हुआ था घायल

बेटे की जान बचाने को जमीन गिरवी रखी, ₹47,800 का बिल चुकाया... पर तुषार ने तोड़ दिया दम, रैपिड स्टेशन के पास एक्सीडेंट में हुआ था घायल

 Written By: Khushbu Rawal
 Published : Sep 25, 2026 03:59 pm IST,  Updated : Sep 25, 2026 04:03 pm IST

साहिबाबाद रैपिड मेट्रो स्टेशन के पास सड़क हादसे में घायल हुए 24 साल के तुषार की मौत हो गई। तुषार को बचाने के लिए पिता ने साहूकार के पास जमीन गिरवी रखकर अस्पताल का बिल चुकाया था।

तुषार कुमार की फाइल...- India TV Hindi
तुषार कुमार की फाइल फोटो। Image Source : REPORTER INPUT

गाजियाबाद के साहिबाबाद रैपिड मेट्रो स्टेशन के पास 19 सितंबर की रात सड़क हादसे में घायल 24 वर्षीय युवक की दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई। मृतक के पिता ने गाजियाबाद के नामचीन प्राइवेट अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पिता का आरोप है कि इलाज के बाद बेटे को अस्पताल से छुड़ाने के लिए उन्होंने जमीन गिरवी रखी। 24 वर्षीय तुषार कुमार को सड़क हादसे में गंभीर चोट के बाद इंदिरापुरम के यशोदा मेडिसिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, तुषार कुमार अपने ऑफिस से घर लौट रहा था। इसी दौरान सुबह करीब 2:30 AM पर रैपिड रेल नमो भारत के साहिबाबाद स्टेशन से 100 मीटर दूर उसे किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। हादसे के बाद राहगीर रोहित शर्मा ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस घायल युवक को उपचार के लिए वसुंधरा के अटलांटा अस्पताल लेकर पहुंची, लेकिन वहां सर्जन उपलब्ध न होने की बात कहते हुए उसे भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद पुलिस उसे इंद्रापुरम के यशोदा मेडिसिटी अस्पताल लेकर पहुंची, जहां उसका उपचार शुरू किया गया।

'भर्ती कराने के 30-35 मिनट बाद ही अस्पताल ने थमा दिया ₹47,800 का बिल'

मृतक के पिता शिव कुमार का आरोप है कि अस्पताल में बेटे को भर्ती कराने के करीब 30 से 35 मिनट बाद ही उन्हें लगभग 47 हजार 800 रुपये का बिल बता दिया गया। पिता के मुताबिक, उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए बेटे को एमएमजी अस्पताल या दिल्ली के किसी सरकारी अस्पताल में रेफर करने का अनुरोध किया था। उनका कहना है कि उन्होंने अस्पताल से यह भी कहा कि वह पैसों का इंतजाम कर लेंगे, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। शिव कुमार के अनुसार, “मेरे पास इतने पैसे नहीं थे। मैंने अस्पताल से कहा कि बच्चे को दूसरे अस्पताल भेज दें, मैं पैसों का इंतजाम कर लूंगा। मेरी पत्नी अस्पताल में बैठ जाएगी, लेकिन मेरी बात नहीं सुनी गई।”

साहूकार से ब्याज पर उधार लिए पैसे

पिता का कहना है कि करीब चार से पांच घंटे की मशक्कत के बाद उन्होंने साहूकार से ब्याज पर 70 हजार रुपये उधार लिए। इनमें से करीब 45 हजार रुपये अस्पताल में जमा किए। इसके बाद लगभग छह हजार रुपये एंबुलेंस के किराये में खर्च कर बेटे को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। 20 सितंबर की शाम करीब चार बजे उपचार के दौरान युवक की मौत हो गई।

अस्पताल ने आरोपों से अलग बताया घटनाक्रम

यशोदा मेडिसिटी की ओर से कहा गया कि मरीज को भर्ती किए जाने के बाद मेडिकल टीम ने तत्काल उसकी जांच की और उसकी स्थिति के अनुरूप उपचार शुरू किया। अस्पताल के अनुसार मरीज को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई और आर्थिक रियायत भी दी गई। अस्पताल का कहना है कि आगे के इलाज और देखभाल को लेकर परिजनों को चिकित्सकीय सलाह दी गई थी।

अस्पताल के मुताबिक, डॉक्टरों की सलाह के बावजूद परिजनों ने अपनी इच्छा से मरीज को LAMA (Leave Against Medical Advice) के तहत अस्पताल से ले जाने का निर्णय लिया। अस्पताल ने कहा कि मरीजों को मेडिकल प्रोटोकॉल और उपलब्ध चिकित्सकीय प्रमाणों के आधार पर उचित उपचार देना उसकी प्राथमिकता है।

वहीं, एक अन्य मामले में ग्रेटर नोएडा में भीषण सड़क हादसा हुआ है। यमुना एक्सप्रेस-वे पर स्लीपर बस में आग लगने से 9 लोगों की मौत हो गई। बस में 35 लोग सवार थे। इनमें से कई लोग आग में बुरी तरह से झुलस गए। 

(रिपोर्ट- जुबैर अख्तर)

यह भी पढ़ें-

गाजियाबाद में दर्दनाक हादसा, ईंटों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली के नीचे दबकर 5 साल की बच्ची की मौत, घटना CCTV में कैद

आजमगढ़ में भीषण सड़क हादसा, पेड़ से टकराकर पलटी तेज रफ्तार स्विफ्ट, तीन युवकों की मौत

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। उत्तर प्रदेश से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।