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कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे स्लिपेज मामला, लापरवाही पर 3 अधिकारी प्रोजेक्ट से बाहर; 2 साल के लिए प्रतिबंधित

 Reported By: Ruchi Kumar Written By: Malaika Imam
 Published : Aug 04, 2026 10:46 pm IST,  Updated : Aug 04, 2026 10:53 pm IST

परियोजना की निगरानी में लापरवाही को लेकर एनएचआईए ने जिम्मेदारी तय करते हुए तीन अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की है। निर्माणकारी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, इंडिपेंडेंट इंजीनियर के टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेसिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को परियोजना से हटा दिया गया है।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे- India TV Hindi
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे Image Source : FILE PHOTO (NHAI)

उत्तर प्रदेश में कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सड़क की सतह में स्लिपेज (खिसकना) की घटना को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHIA) ने बेहद गंभीरता से लिया है। लापरवाही बरतने के आरोप में प्रोजेक्ट मैनेजर समेत तीन अधिकारियों को परियोजना से हटा दिया गया है और उन्हें अगले दो वर्षों के लिए एनएचआईए समेत तीन संस्थानों की परियोजनाओं में प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि एक्सप्रेसवे के डिजाइन और निर्माण की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं है और मरम्मत का पूरा खर्च रियायतग्राही द्वारा उठाया जा रहा है।

परियोजना की निगरानी में लापरवाही बरतने के लिए निर्माणकारी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, इंडिपेंडेंट इंजीनियर के टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेसिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को हटा दिया गया है। इन तीनों को अगले दो वर्षों तक सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, एनएचआईए और एनएचआईडीसीएल की किसी भी परियोजना में शामिल होने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

26 जुलाई को सामने आया था मामला

नियमित रूट पेट्रोलिंग के दौरान 26 जुलाई 2026 को किमी-64 के पास सड़क की सतह में स्लिपेज देखा गया था, जिसकी तुरंत मरम्मत करा दी गई थी। हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण किमी-64 के आसपास के कुछ अन्य हिस्सों में भी स्लिपेज की समस्या आई, जिसे दूर करने के लिए युद्ध स्तर पर काम जारी है।

6 अगस्त तक सुधार कार्य पूरा करने का लक्ष्य

एनएचआईए ने मानसून के बीच 6 अगस्त तक सभी आवश्यक सुधार और मरम्मत कार्यों को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। एनएचआईए ने बताया कि कार्रवाई केवल उस स्थान तक सीमित नहीं है, जहां स्लिपेज सामने आया। दैनिक स्थलीय निरीक्षण के दौरान जिन स्थानों पर ऐसी समस्या की संभावना दिखाई दे रही है, वहां भी निवारक और सुधारात्मक कार्य कराए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य भविष्य में स्लिपेज अथवा किसी अन्य संभावित विफलता को रोकना है।

सरकारी खजाने पर कोई वित्तीय भार नहीं

प्राधिकरण ने साफ किया है कि चूंकि परियोजना अभी रख-रखाव अवधि में है, इसलिए मरम्मत का पूरा खर्च संबंधित रियायतग्राही द्वारा उठाया जा रहा है। इससे सरकार पर कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। एनएचआईए ने डिजाइन या निर्माण गुणवत्ता से जुड़ी आशंकाओं को खारिज करते हुए इसे मानसून के दौरान सतह से जुड़ा सामान्य रख-रखाव मामला बताया है। वर्तमान में एक्सप्रेसवे पर यातायात पूरी तरह सुरक्षित और सुचारु रूप से संचालित हो रहा है।

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