उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए 1997 बैच के सीनियर PCS अधिकारी हरीश चंद्र को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। नोएडा प्राधिकरण में तैनाती के दौरान लगभग 4000 करोड रुपए के लीजबैक भूखंड आवंटन घोटाले से जुड़ा हुआ है मामला। पीसीएस अधिकारी हरीश चंद्र के खिलाफ निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद यूपी सरकार के नियुक्ति विभाग ने उनकी बर्खास्तगी के आदेश जारी किए हैं। अधिकारी के खिलाफ नियमों के विपरीत लीज़ बैक कराने का आरोप था।
योगी सरकार की बड़ी कार्रवाई
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस नीति’ के तहत बड़ी कार्रवाई की है और राज्य के सबसे वरिष्ठ 1997 बैच के PCS अधिकारी हरीश चंद्र को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। पद से बर्खास्तगी से पहले हरीश चंद्र कोलकाता में उत्तर प्रदेश खाद्य एवं रसद विभाग के स्थानिक प्रतिनिधि के पद पर तैनात थे।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, ये पूरा मामला साल 2011 का है, जब हरीश चंद्र नोएडा विकास प्राधिकरण में सचिव पद पर तैनात थे। उनके खिलाफ की गई जांच में पाया गया है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान नियम-कानूनों को ताक पर रखकर बड़ा फर्जीवाड़ा किया और सेक्टर- 140 A, 141, 142 और 143 के तहत आने वाली लगभग 3,81,527 वर्ग मीटर अधिग्रहित भूमि को गलत तरीके से लीजबैक किया। लीजबैक का नियम सिर्फ स्थानीय पात्र किसानों के लिए (प्रति परिवार अधिकतम 450 वर्ग मीटर) था।
जांच रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि नियमों के विपरीत जाकर लीक बैक कर गंभीर अनियमितता एवं भ्रष्टाचार किया गया। नोएडा विकास प्राधिकरण में तैनाती के दौरान ग्राम शहदरा की आबादी निस्तारण के लिए सर्वे कराया गया। आबादी का निर्धारण सेटेलाइट इमेज के आधार पर किया जाना चाहिए था, लेकिन जानबूझकर तथ्यों को छिपाने के लिए सेटेलाइटज इमेज का उपयोग नहीं किया गया। सर्वे आख्या जो प्रस्तुत की गई, उमें कई भू-मालिक, प्राइवेट कंपनियों व ग्राम के बाहर के निवासियों को भी शामिल किया गया। इसमें उनके द्वारा निजी स्वार्थवश कई तथ्यों को छिपाया गया।
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