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राष्ट्रपति मुर्मू के दौरे पर बंदर के अटैक का डर, चश्मा बचाने के लिए गुलेल और लाठी-डंडे से लैस रहेंगे वन विभाग के कर्मचारी

 Edited By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Mar 17, 2026 04:07 pm IST,  Updated : Mar 17, 2026 10:46 pm IST

राष्ट्रपति के दौरे को लेकर वन विभाग के अधिकारी अलर्ट मोड पर है। वन विभाग के कर्मचारियों को गुलेल और लाठी-डंडे के साथ तैनात किया जाएगा। शहर में जगह लंगूर के स्टेच्यू भी लगाए गए हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू- India TV Hindi
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू Image Source : PTI AND REPORTER INPUT

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के मथुरा दौरे को लेकर खास तैयारियां की जा रही हैं। बंदर से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का चश्मा बचाने के लिए गुलेल और लाठी-डंडे से लैस वन विभाग के कर्मचारी तैनात होंगे। उन्हें डराने के लिए लंगूरों के स्टेच्यू भी लगाए जाएंगे। यह स्टेच्यू राष्ट्रपति के आगमन से पहले आज देर शाम या फिर कल सुबह लगाए जाएंगे।

अधिकारियों की उड़ी हुई नींद

आपने झपट्टा मारकर आंखों से चश्मा निकालने वाले वृंदावन के बंदरों के बारे में सुना होगा। यह शरारती बंदर अब अधिकारियों की परेशानी का कारण बन गए हैं। तीन दिवसीय प्रवास पर आ रहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का काला चश्मा बंदरों से बचाने की कवायद में अधिकारियों की नींद उड़ी है।

19 मार्च को मथुरा आ रहीं राष्ट्रपति

30 वन कर्मियों की टीम गुलेल लेकर वृंदावन व गोवर्धन में तैनात होगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तीन दिवसीय प्रवास पर 19 मार्च को मथुरा आ रही हैं। वह वृंदावन के प्रमुख मंदिरों और स्थलों का दौरा करने के साथ ही रामकृष्ण मिश्रन सेवाश्रम चैरिटेबल हास्पिटल के नए कैंसर ब्लाक का लोकार्पण करेंगी। 21 मार्च को वह 21 किमी में विराजे गोवर्धन पर्वरत की भी गोल्फ कोर्ट से परिक्रमा लगाएंगी।

पलक झपकते ही चश्मा पार कर देते हैं बंदर

वृंदावन के बंदर बेहद चतुर हैं। झपट्टा मारकर किसी का भी पलक झपकते चश्मा पार कर देते हैं फिर चश्मा तभी वापस मिलता है, जब उसके बदले उन्हें फ्रूटी का पैकेट "रिश्वत" में दिया जाता है।

गुलेल से बंदर को भगाने की होगी कोशिश

अब राष्ट्रपति आ रही हैं, तो उनका काला चश्मा बचाना भी अधिकारियों की जिम्मेदारी है। वृंदावन और गोवर्धन के बंदर बाहुल्य क्षेत्रों में गुलेल और लाठी-डंडे से लैस वन विभाग के तीस कर्मचारियों की टीम लगेगी। बंदर देखते ही वह गुलेल से उन्हें भगाने की कोशिश करेंगे। 

लंगूर के स्टेच्यू भी लगाए जाएंगे

मथुरा और वृंदावन के जिन क्षेत्रों में बंदर काफी अधिक हैं, वहां आठ कर्मचारी ड्यूटी देंगे, सामान्य संख्या वाले क्षेत्रों में तीन कर्मचारी। इन कर्मचारियों के पास लाल और हरे रंग की लेजर लाइट भी होंगी, जरूरत पर बंदर भगाने के लिए इनका भी उपयोग होगा। कर्मचारियों के साथ ही एक और काम किया जा रहा है। यह है लंगूर के स्टेच्यू लगाने का। जगह-जगह लंगूर के स्टेच्यू भी लगाए जाएंगे, जिससे बंदर उन्हें देखकर पास न आएं। 

लंगूर को देखकर पास नहीं आते बंदर

दरअसल, पहले वीआईपी के दौरे पर कुछ प्रशिक्षकों को लंगूर के साथ तैनात किया जाता था। लंगूर को देखकर बंदर पास नहीं आते। लेकिन वाइल्ड लाइफ के नियमों के मुताबिक, यह ऐसा करना प्रतिबंधित है, ऐसे में अब लंगूर का उपयोग नहीं होता है। उनके स्थान पर स्टेच्यू बनाए जाएंगे।

विपिन सारस्वत की रिपोर्ट

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