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प्रयागराज में मुहर्रम जुलूस के दौरान तलवारबाजी और अन्य हथियारों पर रोक, नहीं मानने पर होगी कार्रवाई

 Reported By: Imran Laik, Edited By: Malaika Imam
 Published : Jun 15, 2026 06:10 pm IST,  Updated : Jun 15, 2026 06:13 pm IST

यूपी के प्रयागराज में मुहर्रम जुलूस को लेकर गाइडलाइन जारी की गई है। इस दौरान तलवारबाजी पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

Prayagraj Muharram Juloos guideline- India TV Hindi
मुहर्रम को लेकर प्रयागराज में गाइडलाइन जारी Image Source : REPORTER INPUT

मुहर्रम का महीना शुरू होने वाला है। इसे लेकर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गाइडलाइन जारी की गई है। प्रयागराज में मुहर्रम के जुलूस के दौरान तलवारबाजी पर रोक लगा दी गई है। जुलूस के दौरान लाठी-डंडे, भाले या किसी भी तरह के हथियार के प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक रहेगी।

डीसीपी (DCP) सिटी मनीष कुमार शांडिल्य ने साफ कहा है कि अगर कोई भी व्यक्ति जुलूस में हथियारों का प्रदर्शन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सभी ताजियादारों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि इस बार कोई भी नई परंपरा शुरू नहीं की जाएगी।

वहीं, प्रयागराज में मुहर्रम कमेटी की बैठक में इस बार के जुलूसों और रस्मों को लेकर कई अहम फैसले लिए गए हैं। कमेटी की बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया है कि प्रयागराज का ऐतिहासिक 'बुड्ढा ताजिया' हर साल की तरह इस बार भी अपनी पूरी शानो-शौकत के साथ उठाया जाएगा। इसके साथ ही 'बुड्ढा ताजिया की मेहंदी' की रस्म भी परंपरा के अनुसार निभाई जाएगी। कमेटी के सभी सदस्यों ने इस फैसले का पूरा समर्थन किया है।

इस बार नहीं उठेगा 'बड़ा ताजिया'

दूसरी ओर, मुहर्रम कमेटी ने इस बार 'बड़ा ताजिया' और उसका आलम न उठाने का निर्णय लिया है। इस साल बड़े ताजिया का जुलूस नहीं निकाला जाएगा। इसकी जगह सिर्फ इमामबाड़े पर फातिहा पढ़ी जाएगी और मुहर्रम की दसवीं तारीख को पारंपरिक रूप से 'ताजिया का फूल' दफन किया जाएगा। वहीं, इस दौरान पुलिस की एक टीम सोशल मीडिया पर भी पैनी नजर रखेगी। माहौल खराब करने वाली या भड़काऊ पोस्ट डालने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।

इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना

आपको बता दें कि मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर (हिजरी कैलेंडर) का पहला महीना होता है। जैसे अंग्रेजी कैलेंडर का पहला महीना जनवरी होता है, वैसे ही इस्लामिक साल की शुरुआत मुहर्रम के महीने से होती है। हालांकि, इस महीने की शुरुआत जश्न मनाकर नहीं की जाती, बल्कि इसे शोक, याद और इबादत कर बिताया जाता है। मुहर्रम के महीने के 10वें दिन को 'आशूरा' कहा जाता है। यह पूरे महीने का सबसे अहम दिन होता है, क्योंकि इसी दिन इमाम हुसैन की शहादत हुई थी। इसके साथ ही, उनके 72 साथियों को बेहद बेदर्दी से शहीद कर दिया गया था।

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