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लखनऊ में चेहल्लुम के जुलूस में शामिल होंगे करीब 40 हजार लोग, किए गए सुरक्षा के कड़े इंतजाम

 Reported By: Ruchi Kumar Written By: Rituraj Tripathi
 Published : Aug 03, 2026 11:07 pm IST,  Updated : Aug 03, 2026 11:29 pm IST

लखनऊ में चेहल्लुम के जुलूस को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है। यहां 40 हजार लोगों के जुटने की उम्मीद है।

Lucknow- India TV Hindi
चेहल्लुम के जुलूस में शामिल होंगे करीब 40 हजार लोग Image Source : INDIA TV

लखनऊ: यूपी की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को चेहल्लुम के जुलूस में करीब 40 हजार लोग शामिल होंगे। ऐसे में लखनऊ में चेहल्लुम के जुलूस के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

जुलूस के रूट को 5 जोन और 18 सेक्टर में बांटा गया

जुलूस के रूट को 5 जोन और 18 सेक्टर में बांटा गया है। जुलूस नाजिम शाह इमामबाड़े से शुरू होकर कर्बला तालकटोरा तक जाएगा। सादे कपड़ो में  liu को तैनात किया गया है। छतों पर पुलिस की ड्यूटी लगाई गई है।

10 कंपनी पीएसी तैनात

जुलूस की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 10 कंपनी पीएसी तैनात की गई है।

चेहल्लुम का जुलूस क्या है?

चेहल्लुम का जुलूस शिया मुस्लिम समुदाय का एक महत्वपूर्ण शोक जुलूस है। चेहल्लुम का मतलब है चालीसवां दिन। यह इमाम हुसैन (हज़रत मुहम्मद के नवासे) और उनके 72 साथियों की कर्बला में शहादत के ठीक 40 दिन बाद मनाया जाता है। यह दिन शोक की अवधि के अंत और कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि देने का अवसर माना जाता है।

यह उत्सव का नहीं बल्कि गम और मातम का जुलूस होता है। जिसमें लोग नौहे और मरसिए पढ़ते हैं यानी शोक गीत और कर्बला की घटनाओं को याद कराने वाली कविताएं पढ़ते हैं। जुलूस के दौरान लोग मातम मनाते हैं और सीनाजनी करते हैं।

इस दौरान ताजिया, जुल्जनाह (बिना सजाया हुआ घोड़ा) आदि निकलते हैं। ये घोड़ा इमाम हुसैन के घोड़े का प्रतीक है।

इस दौरान कभी-कभी अखाड़ों द्वारा तलवारबाजी या अन्य करतब भी दिखाए जाते हैं। जुलूस को किसी निर्धारित जगह पर खत्म किया जाता है।

उत्तर प्रदेश के लखनऊ, आजमगढ़ और दिल्ली, गुमला, बुलंदशहर आदि कई शहरों में ये जुलूस पारंपरिक मार्गों पर निकलता है। अगर इराक की बात करे तो वहां लाखों लोग नजफ से कर्बला तक पैदल यात्रा करते हैं। इसे दुनिया की सबसे बड़ी शांतिपूर्ण सभाओं में से एक माना जाता है। 

संक्षेप में कहे तो चेहल्लुम का जुलूस इमाम हुसैन के बलिदान, सत्य और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की याद में निकाला जाने वाला शोक-जुलूस है।

चूंकि इस जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं, इसलिए इसकी सुरक्षा व्यवस्था को पुख्त रखना जरूरी है।

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