कभी-कभी एक मासूम की आवाज भी बड़े बदलाव की वजह बन जाती है। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में देखने को मिला है। जानकारी के अनुसार कानपुर के बिठूर क्षेत्र के चिरान हृदयपुर गांव में जलभराव की समस्या से परेशान एक नर्सरी की मासूम छात्रा मायरा ने जब सोशल मीडिया पर जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर से मदद की गुहार लगाई, तो उसकी शिकायत सोशल मीडिया के जरिए प्रशासन तक पहुंची। इसके बाद जिलाधिकारी ने मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों और तकनीकी टीम को मौके पर भेजा। प्रशासन की ओर से जेसीबी मशीन की मदद से नाली और चैनल की खुदाई कराकर जमा पानी की निकासी कराई गई। इस कार्रवाई से लंबे समय से परेशानी झेल रहे ग्रामीणों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
मासूम की गुहार पर डीएम ने दिखाई तत्परता
कानपुर में चिरान हृदयपुर गांव में करीब एक महीने से जलभराव की समस्या बनी हुई थी। गंदे पानी, कीचड़ और दुर्गंध के बीच ग्रामीणों का आवागमन मुश्किल हो गया था। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही थी। नर्सरी में पढ़ने वाली मायरा को भी रोजाना स्कूल जाने के लिए पानी से होकर गुजरना पड़ता था। इसी परेशानी को लेकर बच्ची ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई थी। मामला सामने आने के बाद डीएम ने इसे नजरअंदाज करने के बजाय तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
सोशल मीडिया पर शिकायत, जमीन पर उतरी कार्रवाई
जिलाधिकारी कानपुर महेंद्र सिंह तंवर की ओर से सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी के मुताबिक, वीडियो का संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों और तकनीकी टीम को मौके पर भेजा गया। इसके बाद जेसीबी मशीन की सहायता से चैनल और नाली की खुदाई कराई गई, जिससे जमा अतिरिक्त पानी की निकासी का रास्ता बनाया जा सके। शिकायत पर हुई इस कार्रवाई ने दिखाया कि सोशल मीडिया पर सामने आने वाली जनसमस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने से उनके समाधान की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।
सिर्फ पानी निकालने तक सीमित नहीं, दूसरे स्थानों का भी निरीक्षण
प्रशासन की ओर से बताया गया कि प्रभावित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर आसपास के अन्य संभावित जलभराव वाले स्थानों को भी चिह्नित किया जा रहा है। इन स्थानों पर समस्या के स्थायी समाधान के लिए कार्रवाई की जा रही है। साथ ही क्षेत्रीय कर्मचारियों को नियमित सफाई कराने और जलनिकासी का प्रवाह सुचारु बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि दोबारा पानी जमा होने की स्थिति ना बने।
मायरा की आवाज बनी गांव की समस्या उठाने का जरिया
इस पूरे मामले में एक छोटी बच्ची की शिकायत ने गांव की लंबे समय से चली आ रही परेशानी को सार्वजनिक चर्चा में ला दिया। मायरा की गुहार के बाद जिला प्रशासन की सक्रियता से जलनिकासी का काम शुरू हुआ। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर की ओर से तत्काल संज्ञान लेकर अधिकारियों को मौके पर भेजना प्रशासनिक जवाबदेही का उदाहरण है। हालांकि, ग्रामीणों को वास्तविक और स्थायी राहत तभी मिलेगी, जब गांव में जलभराव की समस्या दोबारा न लौटे और नियमित सफाई व जलनिकासी की व्यवस्था बनी रहे।
(रिपोर्ट - अनुराग श्रीवास्तव)
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