उत्तर प्रदेश MLC चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) ने वाराणसी में शानदार प्रदर्शन करते हुए सियासी हलचल तेज कर दी है। सपा ने वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में अपनी सीट बरकरार रखी, जबकि वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी पार्टी के उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा आगे चल रहे हैं। वहीं, बीजेपी की ओर से धांधली के आरोप लगाए जाने के बाद प्रशासन ने चार चरणों की मतगणना पूरी होने के बाद पांचवें चरण की गिनती रोक दी थी। कुछ समय बाद पांचवें चरण की गिनती पूरी होने के बाद अगले चरण के लिए काउंटिंग शुरू हुई।
हालांकि, प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों के लिए हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कुल मिलाकर बढ़त बनाए रखी। भाजपा ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि एक अन्य सीट पर भी उसकी बढ़त बताई गई। ऐसे में वाराणसी में सपा की जीत को स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वाराणसी शिक्षक सीट पर लाल बिहारी यादव की बड़ी जीत
वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के लाल बिहारी यादव ने भाजपा के प्रमोद कुमार मिश्रा को 4,898 मतों से हराया। वर्ष 2020 के चुनाव में मिश्रा निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में थे और लाल बिहारी यादव से महज 936 मतों से हार गए थे। इस बार जीत का अंतर काफी बढ़ गया। जीत के बाद लाल बिहारी यादव ने शिक्षकों का समर्थन मिलने का दावा करते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को इसका श्रेय दिया। उन्होंने समाचार एजेंसी ANI से कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सकारात्मक दृष्टिकोण के कारण सपा प्रदेश की सभी सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ सकी। उन्होंने कहा कि जिस तरह मुलायम सिंह यादव को शिक्षक समुदाय का नेता माना जाता था, उसी तरह अखिलेश यादव की भी शिक्षकों के प्रति वैसी ही सोच है। लाल बिहारी यादव ने यूजीसी से जुड़े विवाद का चुनाव पर कोई खास प्रभाव पड़ने से इनकार किया। उनके मुताबिक, नौकरी की सुरक्षा चाहने वाले लोग सपा के साथ खड़े रहे।
स्नातक सीट पर भी सपा की निर्णायक बढ़त
वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी सपा के आशुतोष सिन्हा भाजपा उम्मीदवार केदारनाथ सिंह के मुकाबले मजबूत स्थिति में रहे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस सीट पर आशुतोष सिन्हा की निर्णायक जीत तय मानी जा रही थी। वाराणसी की दोनों सीटों पर सपा का मजबूत प्रदर्शन इसलिए भी अहम है, क्योंकि यह क्षेत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से इसे भाजपा के स्थानीय संगठन और मतदाता आधार के सामने एक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या हैं शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र?
विधान परिषद वाले राज्यों में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अलग से चुनाव कराए जाते हैं। इन सीटों पर आम जनता के बजाय निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले पंजीकृत शिक्षक और स्नातक मतदाता मतदान करते हैं। भारतीय संविधान के तहत विधान परिषदों की संरचना में इन वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य शिक्षकों और शिक्षित वर्ग को विधायी प्रक्रिया में अपनी बात रखने का अवसर देना है। इन चुनावों में वरीयता आधारित मतदान प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इनका चुनावी गणित सामान्य विधानसभा या लोकसभा चुनावों से अलग होता है।
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