यूपी में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। इससे पहले चर्चा है कि यूपी में BJP के तमाम मौजूदा विधायकों के टिकट काटे जा सकते हैं। इस बीच, UP बीजेपी चीफ पंकज चौधरी ने ANI को दिए इंटरव्यू में स्मिता प्रकाश के सवाल के जवाब में बताया कि क्या बीजेपी आगामी विधानसभा चुनाव में यूपी में 40 फीसदी मौजूदा विधायकों के टिकट काटने जा रही है। जानिए पंकज चौधरी ने इस सवाल के जवाब में क्या बताया।
हमारी पार्टी किसी परिवार की पार्टी नहीं
यूपी बीजेपी चीफ चौधरी ने कहा, ''मेरी पार्टी किसी एक परिवार, एक व्यक्ति या एक कपल की पार्टी नहीं है। हमारे यहां कोई भी निर्णय सामूहिक रूप से लिया जाता है। उसमें हमारे जिलाध्यक्ष की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है और संगठन के क्षेत्रीय अध्यक्ष का भी महत्व होता है। सभी से इनपुट लिए जाते हैं। मैं आपको एक पुरानी घटना बताता हूं। यह 1993 के चुनाव की बात है। मैं 1991 में सांसद बन गया था और उस समय कल्याण सिंह हमारे नेता थे।''
पंकज चौधरी ने सुनाया कल्याण सिंह से जुड़ा पुराना किस्सा
पंकज चौधरी ने कहा कि मैं भाजपा में नया-नया आया था। हमारे जिले से उम्मीदवारों की एक सूची आई थी। आमतौर पर भारतीय जनता पार्टी में हर विधानसभा क्षेत्र से तीन नामों का पैनल आता है। हमारे जिले से भी ऐसा ही पैनल आया था और टिकटों पर निर्णय होना बाकी था। आप जानती हैं कि दिल्ली में बड़े नेताओं को लोग घेरे रहते हैं। ऐसे में नेता किसी गोपनीय जगह की तलाश करते हैं, जहां बैठकर आराम से निर्णय लिया जा सके। कल्याण सिंह मुझे बहुत पसंद करते थे और मेरा काफी सम्मान करते थे। एक दिन उनका फोन आया। उन्होंने पूछा, "पंकज, कहां हो?"
पंकज चौधरी के घर पर हुई थी टिकटों पर चर्चा
तब मैंने कहा, "भाई साहब, दिल्ली में हूं।" उन्होंने पूछा, "परिवार कहां है?" मैंने कहा, "गोरखपुर में है।" उन्होंने कहा, "कल मैं आ रहा हूं।" मैंने कहा, "आइए, आपका स्वागत है।" अगले दिन कल्याण सिंह मेरे घर आए। उनकी सुरक्षा व्यवस्था भी वहां पहुंच गई। इसके बाद कलराज मिश्रा और संसदीय बोर्ड की बैठक में शामिल होने वाले दूसरे नेता भी आ गए। टाइपराइटर सहित सभी जरूरी व्यवस्थाएं कर ली गईं। तय हुआ कि सभी लोग यहीं बैठेंगे और टिकटों पर निर्णय भी यहीं होगा। निर्देश दिया गया कि फाटक बंद कर दिया जाए और किसी को अंदर न आने दिया जाए।
जब पंकज चौधरी ने कल्याण सिंह के सामने रखे 5 उम्मीदवारों के नाम
पंकज चौधरी ने बताया कि अब बैठक मेरे घर में हो रही थी, तो मैंने सोचा कि अपने जिले के टिकटों के बारे में भी बात कर लेता हूं। लेकिन कल्याण सिंह की अपनी कार्यशैली थी। उनके पास भी सूचनाएं जुटाने के अलग-अलग स्रोत थे। मैंने उनसे कहा, "सर, अगर हमारे जिले वाला मामला भी आप देख लेते तो..." उन्होंने पूछा, "क्या करोगे तब?" मैंने कहा, "अगर आप मेरे हिसाब से पांच टिकट दे दें, तो मैं कम-से-कम चार उम्मीदवारों को जिताकर लाऊंगा।" उम्मीदवारों के नाम पहले से आए हुए थे। मैं उन्हीं में से अपनी पसंद बता रहा था।
कल्याण सिंह को दिलाया 5 में से 4 सीटों पर जीत का भरोसा
उन्होंने बताया कि कल्याण सिंह ने अपनी डायरी निकाली और कहा, "लिखो।" मैंने लिखा कि इस विधानसभा क्षेत्र से इस उम्मीदवार को, दूसरी विधानसभा से दूसरे उम्मीदवार को और इसी तरह पांच विधानसभा क्षेत्रों में मेरी पसंद के उम्मीदवारों को टिकट दिया जाए। मैंने यह भी लिखा कि अगर इन पांच लोगों को टिकट दिया गया, तो मैं कम-से-कम चार को जिताकर लाऊंगा। उन्होंने पूछा, "नहीं जिता पाए तो?" मैंने कहा, "आप जो भी दंड देंगे, उसे मैं सहर्ष स्वीकार करूंगा।" उन्होंने कहा, "यह भी लिखो।" फिर बोले, "तारीख डालो और समय भी लिखो।" मैंने तारीख और समय भी लिख दिया।
मैं सिर्फ जीतने वाले कैंडिडेट की पैरवी करता हूं
पंकज चौधरी ने आगे कहा कि भगवान की कृपा से मेरा आकलन सही साबित हुआ। हमारा लक्ष्य हमेशा जीत रहा है। अपने क्षेत्र में भी अगर कोई व्यक्ति मेरा बहुत करीबी है, लेकिन उसके जीतने की संभावना नहीं है, तो मैं उसकी पैरवी नहीं कर सकता। जब चुनाव के परिणाम आए, तो मेरे सुझाए गए पांच उम्मीदवारों में से चार जीत गए। मैं कल्याण सिंह से मिलने गया, तो उन्होंने मेरी पीठ थपथपाई। इससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा।
कल्याण सिंह ने मुझसे पैनल की जगह मांगा सिर्फ 1 नाम
यूपी बीजेपी चीफ बोले कि इसके बाद 1996 का विधानसभा चुनाव आया। इस बार भी मैं अपने जिले का पैनल लेकर कल्याण सिंह के पास गया। उन्होंने कहा, "नहीं-नहीं, पैनल नहीं। तुम सीधे एक-एक नाम दो।" मैंने पांच उम्मीदवारों के नाम दिए। इस बार भी उनमें से चार चुनाव जीत गए। हालांकि, इस बार उन्होंने डायरी में कुछ नहीं लिखवाया। अब मैं 1999 की बात बताता हूं। मैं यह उदाहरण इसलिए दे रहा हूं, ताकि आप समझ सकें कि हमारी पार्टी में टिकटों की समीक्षा और उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया कैसे चलती है।
सीनियर नेताओं को मेरे आकलन पर होने लगा था भरोसा
पंकज चौधरी ने कहा कि उस समय तक मैं पार्टी में बहुत पुराना नहीं हुआ था, लेकिन वरिष्ठ नेताओं को मेरे आकलन और सूचनाओं पर भरोसा होने लगा था। एक दिन कल्याण सिंह का फोन आया। उन्होंने कहा, "जरा तीन-चार लोकसभा क्षेत्रों के बारे में बताओ। वहां किसकी क्या स्थिति है?" उन्होंने मुझसे बांसगांव, संतकबीर नगर, बस्ती और सिद्धार्थनगर लोकसभा क्षेत्रों की स्थिति पूछी। मुझसे भी फीडबैक लिया जाता था और निश्चित रूप से दूसरे तमाम लोगों से भी जानकारी ली जाती होगी।
पंकज चौधरी ने सुनाया रामपाल सिंह से जुड़ा किस्सा
उन्होंने आगे कहा कि उस समय सिद्धार्थनगर के सांसद रामपाल सिंह थे। वह उम्र में मुझसे काफी बड़े थे। उनके बेटे भी मुझसे बड़े थे, लेकिन उनसे मेरी बहुत गहरी मित्रता थी। जब सिद्धार्थनगर की बात आई, तो मैंने कहा, "भाई साहब, वहां तो सब ठीक है। रामपाल सिंह मौजूदा सांसद हैं।" उन्होंने कहा, "नहीं, उनकी तबीयत बहुत खराब है।" संयोग से रामपाल सिंह को कुछ समय पहले हल्का-सा एंजाइना पेन हुआ था। मैं खुद उन्हें उनके घर से डॉक्टर के पास लेकर गया था और उनका इलाज कराया था।
विरोधियों ने रामपाल सिंह के खिलाफ किया था दुष्प्रचार
पंकज चौधरी ने आगे कहा कि मुझे उनकी स्वास्थ्य संबंधी स्थिति की जानकारी थी। डॉक्टर ने कहा था कि कोई गंभीर बात नहीं है। दवा लेने से वह ठीक हो जाएंगे। लेकिन उनके विरोधियों ने नेताओं तक ऐसी जानकारी पहुंचाई थी कि रामपाल सिंह बहुत बीमार हैं, बिस्तर पर हैं और चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इसके बाद मैंने रामपाल सिंह से कहा, "भैया, जल्दी जाइए और अपना फिटनेस सर्टिफिकेट दीजिए, नहीं तो आपका टिकट कट जाएगा।"
40 फीसदी टिकट काटे जाने का कोई फॉर्मूला नहीं
मैंने भी कल्याण सिंह के सामने उनकी वास्तविक स्थिति बताने की पूरी कोशिश की। बाद में रामपाल सिंह ने नेताओं से मुलाकात की और उन्हें टिकट भी मिल गया। मैं यह बताना चाहता हूं कि हमारी पार्टी में उम्मीदवारों के चयन के लिए अलग-अलग स्रोतों से जानकारी जुटाई जाती है। ऐसा नहीं है कि पहले से कोई फॉर्मूला तय कर दिया गया हो कि 40 प्रतिशत टिकट काटे जाएंगे या 50 प्रतिशत टिकट बदले जाएंगे।
टिकट देने से पहले हर उम्मीदवार की होगी समीक्षा
उन्होंने कहा कि हमारा मुख्य लक्ष्य चुनाव जीतना होता है। उसी आधार पर पार्टी निर्णय लेती है। इसलिए यह कहना सही नहीं है कि 40 प्रतिशत या 20 प्रतिशत टिकट काटे जाएंगे। हर उम्मीदवार की समीक्षा होगी। हमारे संगठन में निर्णय लेने के लिए कई मंच हैं। उन मंचों पर चर्चा होगी और उम्मीदवारों के चयन में जीत की संभावना को विशेष महत्व दिया जाएगा। इससे पहले, पंकज चौधरी ने कहा था कि BJP का प्रदेश अध्यक्ष पद सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से भी अहम है।
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