उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में निजी स्कूलों में पढ़ने का सपना देख रहे गरीब परिवारों के बच्चों को अगर आरटीई के तहत आवंटन मिलने के बाद भी दाखिला नहीं मिलता, तो अब स्कूल प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कानपुर में शिक्षा के अधिकार के तहत आवंटित बच्चों के प्रवेश को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। शैक्षिक सत्र 2026-27 में शत-प्रतिशत दाखिले नहीं करने वाले 22 निजी स्कूल जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर के रडार पर आ गए हैं। डीएम ने समीक्षा बैठक में साफ निर्देश दिए हैं कि तीन दिन के भीतर लंबित प्रवेश पूरे कराए जाएं और यदि ऐसा नहीं होता है तो संबंधित स्कूल की मान्यता निरस्त करने के लिए नियमानुसार कार्रवाई शुरू की जाएगी। हालांकि जिन स्कूलों का नाम लिस्ट में है उसका अर्थ यह नहीं है कि सभी स्कूलों की मान्यता निरस्त करने का फैसला हो चुका है। फिलहाल प्रशासन ने लंबित दाखिले पूरे करने के निर्देश दिए हैं और आगे की कार्रवाई निर्धारित नियमों के अनुसार होगी।
तीन दिन का अल्टीमेटम, अब दाखिलों पर होगी सीधी निगरानी
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने 22 अक्टूबर को आयोजित समीक्षा बैठक में शैक्षिक सत्र 2026-27 के तहत RTE प्रवेश की स्थिति की समीक्षा की। इसमें सामने आया कि 22 विद्यालयों में आवंटित बच्चों का शत-प्रतिशत प्रवेश पूरा नहीं हुआ है। इसके बाद डीएम ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को लंबित दाखिलों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने के निर्देश दिए। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि पात्र बच्चों को आवंटन मिलने के बाद स्कूल में प्रवेश के लिए अनावश्यक इंतजार ना करना पड़े। इसके लिए संबंधित विद्यालयों की स्थिति पर नजर रखी जाएगी। स्कूलवार आवंटित बच्चों की संख्या और वास्तविक दाखिलों का मिलान कर यह देखा जाएगा कि कितने बच्चों को प्रवेश मिल चुका है और कितने अभी भी दाखिले की प्रतीक्षा कर रहे हैं। डीएम ने स्पष्ट किया कि शिक्षा के अधिकार के तहत पात्र बच्चों को उनके अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। प्रवेश में देरी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाने से उनकी शैक्षिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं, जबकि अभिभावकों को भी स्कूलों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। इसी को देखते हुए विद्यालयों को तीन दिन के भीतर लंबित प्रवेश पूरे करने की समयसीमा दी गई है।
बड़े नाम भी लिस्ट में, स्कूल प्रबंधन की बढ़ सकती है परेशानी
कानपुर में आरटीई दाखिलों को लेकर जारी लिस्ट इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें कई बड़े निजी स्कूल समूहों की शाखाएं शामिल हैं। लिस्ट में शामिल होने स्कूलों को लंबित प्रवेश पूरे करने होंगे। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि प्रत्येक स्कूल में आवंटित बच्चों और वास्तविक दाखिलों की स्थिति पर निगरानी रखी जाए। इससे प्रवेश संबंधी दावों और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर सामने लाने में मदद मिलेगी। हालांकि, प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी में प्रत्येक स्कूल के लंबित दाखिलों की अलग-अलग संख्या नहीं बताई गई है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि किस विद्यालय में कितने बच्चों का प्रवेश बाकी है। फिलहाल कार्रवाई का आधार शत-प्रतिशत प्रवेश पूरा नहीं होना बताया गया है।
RTE क्या है और बच्चों को कैसे मिलता है लाभ?
शिक्षा का अधिकार अधिनियम यानी RTE के तहत पात्र बच्चों को निर्धारित नियमों के अनुसार निजी गैर-सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रवेश का अवसर दिया जाता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच आसान बनाना है। प्रवेश प्रक्रिया में बच्चों को विद्यालय आवंटित होने के बाद संबंधित स्कूल में दाखिला पूरा होना जरूरी है। यदि आवंटन के बावजूद प्रवेश नहीं होता, तो बच्चे और उनके अभिभावक परेशानी में पड़ सकते हैं। यही वजह है कि दाखिलों की समीक्षा में प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। कानपुर में इस बार प्रशासन ने लंबित प्रवेश को लेकर समयसीमा तय कर दी है। अब संबंधित स्कूलों की जिम्मेदारी होगी कि वे आवंटित बच्चों के दाखिले पूरे करें और प्रवेश की स्थिति स्पष्ट रखें।
समयसीमा के बाद क्या होगा?
तीन दिन की मोहलत पूरी होने के बाद प्रशासन की नजर इस बात पर रहेगी कि संबंधित विद्यालयों ने कितने लंबित दाखिले पूरे किए। बेसिक शिक्षा विभाग स्कूलवार स्थिति की निगरानी करेगा। यदि निर्देशों के बावजूद दाखिले लंबित रहते हैं, तो संबंधित विद्यालयों के खिलाफ मान्यता निरस्त करने समेत नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल 22 विद्यालयों को लेकर प्रशासन का संदेश स्पष्ट है कि आरटीई के तहत आवंटित बच्चों के प्रवेश को लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। अब देखना होगा कि निर्धारित समयसीमा में सभी विद्यालय दाखिले पूरे कराते हैं या कुछ स्कूलों के खिलाफ अगली कार्रवाई की नौबत आती है।
(रिपोर्ट - अनुराग श्रीवास्तव)
ये भी पढ़ें