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यूपी में हाईवे पर गाड़ी रोककर की गई थी मां और नाबालिग बेटी से हैवानियत, अब कोर्ट ने 5 दोषियों को दी कड़ी सजा

 Published : Dec 22, 2025 04:22 pm IST,  Updated : Dec 22, 2025 07:00 pm IST

यूपी के बुलंदशहर में 29 जुलाई 2016 की रात परिवार को बंधक बनाकर मां-बेटी से गैंगरेप किया गया था। अब हाइवे के हैवानों पर पोक्सो कोर्ट का फैसला सामने आ गया है। पांचों दोषियों को अजीवन कारावास की सजा दी गई है।

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सांकेतिक फोटो। Image Source : FREEPIK/ANI

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में नौ साल पहले हुए बहुचर्चित मां-बेटी हाईवे गैंगरेप मामले में विशेष पॉक्सो कोर्ट ने पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने प्रत्येक दोषी पर 1.81 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। विशेष पॉक्सो कोर्ट बुलंदशहर के न्यायाधीश ओम प्रकाश तृतीय ने इन पांचों आरोपियों को 20 दिसंबर 2025 को दोषी करार दिया था। सजा पाने वालों में कन्नौज के जुबेर और साजिद, तथा फर्रुखाबाद के धर्मवीर, नरेश और सुनील शामिल हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना 28 जुलाई, 2016 की रात बुलंदशहर के नेशनल हाईवे-91 पर हुई थी। नोएडा का एक परिवार अपनी कार से शाहजहांपुर स्थित पैतृक गांव जा रहा था, जहां तेरहवीं का कार्यक्रम था। कार में 14 वर्षीय लड़की, उसके माता-पिता, ताई-ताऊ और चचेरा भाई सवार थे। दोस्तपुर फ्लाईओवर के पास कुछ बदमाशों ने कार के नीचे रिम डालकर उसे रुकवा लिया। इसके बाद परिवार को बंधक बनाकर खेतों में ले जाया गया। बदमाशों ने पति के साथ मारपीट की और फिर मां-बेटी के साथ गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया। घटना की सूचना मिलते ही अधिकारी मौके पर पहुंचे और मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

CBI को ट्रांसफर किया गया था मामला

यह मामला तत्कालीन अखिलेश सरकार के दौरान काफी चर्चा में रहा था और राष्ट्रीय मीडिया ने एक महीने तक बुलंदशहर में डेरा डाल रखा था। घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन डीजीपी और मुख्य सचिव ने भी घटनास्थल का दौरा किया था। कुछ दिनों बाद सरकार की फजीहत होने पर यह मामला सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया गया था। इस मामले में कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

इस घटना को तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार ने संज्ञान में लिया था। तब एसएसपी बुलंदशहर, एसपी सिटी, सीओ कोतवाली देहात के इंस्पेक्टर सहित हाईवे पर गश्त करने वाली पेट्रोलिंग टीम के दरोगा और सिपाही समेत कुल 17 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था। इस मामले में पुलिस ने नोएडा और हरियाणा पुलिस के साथ मिलकर दो आरोपियों को एनकाउंटर में मार गिराया था। एक अन्य आरोपी की भी मौत हो चुकी है। सीबीआई ने इस मामले में छह लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सजा का ऐलान किया

बुलंदशहर में 22 दिसंबर को न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट ओमप्रकाश मिश्रा ने नौ साल पुराने गैंगरेप मामले में फैसला सुनाया। कोर्ट ने पांच आरोपियों को आजीवन कारावास और प्रत्येक को 1,81,000 रुपये के अर्थदंड की सजा से दंडित किया। पीड़ित पक्ष की अधिवक्ता ने बताया कि पीड़िता ने फोन पर मीडियाकर्मियों से बात की। पीड़िता ने कोर्ट द्वारा सुनाए गए आजीवन कारावास की सजा पर संतोष व्यक्त किया और कहा कि वह इस फैसले से खुश है। एडीसी वरुण कौशिक ने जानकारी देते हुए बताया कि नौ साल तक चले इस मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया। इस दौरान कुल 22 लोगों की गवाही हुई और आज फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा न्यायाधीश ने सजा का ऐलान किया।

दोषियों के नाम सामने आए

आजीवन कारावास की सजा पाने वाले दोषियों के नाम हैं: धर्मवीर उर्फ राका उर्फ जितेंद्र (निवासी गेसनपुर, फर्रुखाबाद), नरेश उर्फ संदीप उर्फ राहुल (निवासी गेसनपुर, फर्रुखाबाद), सुनील उर्फ सागर (निवासी बोनपई आजादनगर, फर्रुखाबाद), परवेज उर्फ जुबेर उर्फ सुनील (निवासी ईटाखारी दिनौरा, कन्नौज) और साजिद (निवासी ईटाखारी दिनौरा, कन्नौज)। (रिपोर्ट: वरुण शर्मा)

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