महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने हाल ही में सोशल मीडिया पर ऋषिकेश की तस्वीरें शेयर करते हुए पुरानी यादों को ताजा किया। उन्होंने अपने फिल्ममेकिंग के दिनों को याद करते हुए शहर के बदलते स्वरूप पर प्रतिक्रिया दी और उम्मीद जताई कि विकास के बावजूद ऋषिकेश अपनी आत्मा को बनाए रखे। उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है।
एक्स पर शेयर की पोस्ट
एक्स (पूर्व ट्विटर) पर तस्वीरें शेयर करते हुए आनंद महिंद्रा ने लिखा, “ऋषिकेश… ये तस्वीरें मुझे सीधे मेरे फिल्ममेकिंग के दिनों में ले जाती हैं। जब मैं अपना थीसिस फिल्म बना रहा था, तब छोटीवाला रेस्तरां लगभग मेरा कैंटीन था। और मैं स्वर्ग आश्रम के पीछे पहाड़ियों में जाकर साधु बंखंडी बाबा की फिल्मिंग करता था।” उन्होंने बताया कि काफी समय से वे ऋषिकेश नहीं गए हैं, लेकिन शहर में काफी बदलाव नजर आ रहा है।
रिवरफ्रंट को बताया स्वागत योग्य फेसलिफ्ट
आनंद महिंद्रा ने शहर के नए रिवरफ्रंट वॉकवे और सुंदर पब्लिक स्पेस का जिक्र करते हुए कहा कि यह एक स्वागत योग्य फेसलिफ्ट है। उन्होंने लिखा, “एक ऐसे शहर के लिए जहां प्रकृति ही ज्यादातर सजावट करती रही है, यह बदलाव अच्छा है। लेकिन मैं सिर्फ यही उम्मीद करता हूं कि इन सभी बदलावों के बीच ऋषिकेश अपनी आत्मा को बचाए रखे। अब खुद जाकर देखने का समय आ गया है।” उनकी पोस्ट में #SundayWanderer हैशटैग भी था।
आनंद महिंद्रा ने शेयर की यादें
आनंद महिंद्रा की यह यादें उनके छात्र जीवन से जुड़ी हैं, जब वे फिल्ममेकिंग की पढ़ाई कर रहे थे। छोटीवाला रेस्तरां ऋषिकेश का एक प्रसिद्ध स्थान है, जो गंगा किनारे स्थित है और दशकों से पर्यटकों और स्थानीय लोगों का पसंदीदा रहा है। स्वर्ग आश्रम के आसपास की पहाड़ियां आध्यात्मिक माहौल के लिए जानी जाती हैं, जहां साधु-संतों का निवास रहा है। बंखंडी बाबा को फिल्म में कैद करना उनके थीसिस का हिस्सा था।
ऋषिकेश का बदलता स्वरूप
ऋषिकेश को योग की राजधानी और आध्यात्मिक पर्यटन का केंद्र माना जाता है। हाल के वर्षों में शहर में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास हुआ है। गंगा किनारे नए वॉकवे, साफ-सुथरे सार्वजनिक स्थान और सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। इन बदलावों को कई लोग सकारात्मक मानते हैं, लेकिन कुछ चिंतित भी हैं कि ज्यादा विकास से शहर का प्राकृतिक और आध्यात्मिक स्वरूप प्रभावित न हो। ऋषिकेश न सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि एडवेंचर टूरिज्म, योग और वेलनेस का भी बड़ा केंद्र बन चुका है। बीटल्स के ऋषिकेश आने की कहानी भी शहर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाती है। आनंद महिंद्रा जैसे उद्योगपति का शहर के प्रति लगाव और उसकी आत्मा को बचाने की चिंता महत्वपूर्ण है। विकास जरूरी है, लेकिन प्रकृति और संस्कृति का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक। आनंद महिंद्रा की पोस्ट ने इसी चिंता को आवाज दी। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उनकी पोस्ट पर अपनी-अपनी यादें शेयर कीं।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
कुछ ने ऋषिकेश के पुराने दिनों को याद किया, तो कुछ ने विकास और संरक्षण के बीच संतुलन की जरूरत पर जोर दिया। कई लोगों ने कहा कि गंगा किनारे बैठकर नदी के प्रवाह को देखना ही शहर की असली खुशी है।
एक व्यक्ति ने कहा, “शहर के कॉस्मेटिक डेवलपमेंट को छोड़ दें, तो किनारे पर चट्टानों पर बैठकर गंगा के बहाव को सुनना और देखना ही असली मज़ा है।”
एक और ने कहा, “सर, मैं असम से गुजरात के कच्छ तक, वैष्णोदेवी माता से कन्याकुमारी तक घूमा हूं; ऋषिकेश में मुझे जो शांति मिली, वह किसी और शहर में नहीं मिली, यहां तक कि दुबई में भी नहीं, जहां मैं 8 साल रहा। मेरा रिटायरमेंट ऋषिकेश में होगा।”
एक यूजर ने कहा, “ऋषिकेश में कुछ खास बात है, मैं साल में एक बार यहां आना पसंद करता हूं!“
इस बीच, एक दूसरे व्यक्ति ने शेयर किया, “आपका स्वागत है, बस थोड़ी पुरानी यादें ताज़ा करने के लिए। लेकिन यह वह ऋषिकेश नहीं है जो आप अभी देखेंगे, इसलिए उम्मीदें कम रखें। मैं वॉकवे पर बैठा हूँ और यह लिख रहा हूं। मैंने पिछले कुछ सालों में चीज़ें गलत होते देखी हैं।”
गौरतलब है कि, इससे पहले आनंद महिंद्रा ने मुंबई में गणेश विसर्जन की भव्य झलक दिखाते हुए वहां की तारीफ भी की थी।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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