Viral Video : दुनिया भर के देशों में बाघों को बचाने की मुहिम चलती रहती है। इसका उद्देश्य लुप्तप्राय बाघों के आवास की रक्षा करना और अवैध शिकार को रोकना है। मगर, भारत के पटना स्थित चिड़ियाघर (संजय गांधी जैविक पार्क) में एक सफेद बाघ की हालत को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। दरअसल, वायरल हो रहे एक वीडियो में उसे अपने बाड़े के अंदर कमजोर और सुस्त दिखाया गया है। बाघ धीरे-धीरे चलता हुआ दिखाई दिया और कई दर्शकों को लगा कि वह दुबला-पतला और अस्वस्थ है। इस फुटेज के सामने आने से जानवर के स्वास्थ्य और उसकी देखभाल को लेकर सवाल उठने लगे। कई लोगों ने चिंता जताई कि क्या बाघ को पर्याप्त भोजन, उचित चिकित्सा देखभाल और घूमने-फिरने के लिए पर्याप्त जगह मिल रही है।
PETA इंडिया ने किया रिएक्ट
इस वीडियो को एक्स पर @RahulSeeker नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में PETA इंडिया ने हस्तक्षेप किया और चिड़ियाघर के अधिकारियों से कार्रवाई करने की मांग की। संगठन ने अपनी अपील में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राज्य के पर्यावरण विभाग को भी टैग किया। लिखा कि, 'हम पटना चिड़ियाघर से अनुरोध करते हैं कि इस बाघ को किसी अभयारण्य में पुनर्वासित किया जाए, जहां ज़ूकोसिस कम हो सके और उम्मीद है कि शारीरिक स्थिति में सुधार हो सके।' संगठन ने कहा कि बाघ में ज़ूकोसिस के लक्षण दिखाई दे रहे होंगे, जो कि एक मानसिक स्वास्थ्य समस्या है जो उन जानवरों में देखी जाती है जिन्हें लंबे समय तक छोटे या तनावपूर्ण स्थानों में रखा जाता है। संगठन ने सुझाव दिया कि बाघ को अभयारण्य में स्थानांतरित करने से उसके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों में सुधार हो सकता है।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया
वीडियो देखने वाले कई लोगों ने ऑनलाइन अपनी चिंताएं साझा कीं। कुछ ने कहा कि बाघ कुपोषित लग रहा था, जबकि अन्य को लगा कि वह थका हुआ और परेशान दिख रहा है। कई यूजर्स ने उचित चिकित्सा जांच और चिड़ियाघर के अधिकारियों से स्पष्ट जानकारी देने की मांग की। एक यूजर ने लिखा, 'उसे भोजन चाहिए। उसे अपना प्राकृतिक आवास चाहिए। उसे सुरक्षित रहने की जरूरत है। सबसे दुखद बात यह है कि अब यह घटना हमें आश्चर्यचकित नहीं करती।' दूसरे यूजर ने टिप्पणी की, 'यह दिल दहला देने वाला है; सफेद बाघ देखभाल के हकदार हैं, उपेक्षा के नहीं।' तीसरे ने कहा कि, 'इस बेचारे जीव को देखकर मेरा दिल टूट जाता है। ऐसे जानवरों को जंगलों में होना चाहिए, न कि आत्माहीन चिड़ियाघरों में।'एक और यूजर ने लिखा कि, 'मुझे चिड़ियाघर का विचार बिल्कुल पसंद नहीं है। जानवरों के रहने के लिए यह बहुत छोटी जगह है। राष्ट्रीय उद्यान जैसी अवधारणा कहीं बेहतर है, कम से कम वहां जानवर स्वतंत्र रूप से घूम सकते हैं।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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