अमेरिका में रहने वाली भारतीय कंटेंट क्रिएटर सोनल चौधरी के एक वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा छेड़ दी है। अमेरिका में रह रहीं सोनल ने अपनी दो साल की बेटी बानी के लिए प्राइवेट प्रीस्कूल का दौरा किया। वहां सालाना फीस सुनकर वे खुद हैरान रह गईं। दो दिन के प्रोग्राम की फीस करीब 4 लाख रुपये और पांच दिन वाले फुल प्रोग्राम की फीस लगभग 9 लाख रुपये सालाना बताई गई। उन्होंने इसकी तुलना भारत में नई मारुति ब्रेजा की कीमत से की।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @sonalbisla नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में सोनल ने अपनी दो साल की बेटी के लिए विकल्पों की तलाश करते हुए एक निजी प्रीस्कूल का दौरा किया। इस दौरान एक कर्मचारी ने उन्हें प्रीस्कूल का पूरा दौरा कराया और दैनिक कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी, साथ ही उपलब्ध विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में भी बताया। वीडियो में उन्होंने बताया कि प्रीस्कूल में आठ बच्चों के समूह के लिए दो शिक्षक हैं, यानी हर चार बच्चों पर एक शिक्षक है। कार्यक्रम में गायन, योग, रचनात्मक अभ्यास और प्रारंभिक शिक्षा जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
बताई अलग-अलग सेशन की फीस
सोनल ने बताया कि प्रीस्कूल में सप्ताह में दो दिन के कार्यक्रम के लिए सालाना लगभग 4,000 डॉलर यानी 3.8 लाख रुपये लिए जाते हैं। सप्ताह में पांच दिन आने वाले बच्चों के लिए वार्षिक शुल्क बढ़कर लगभग 9,000 डॉलर या 8.5 लाख रुपये हो जाता है। शैक्षणिक सत्र सितंबर से जून के अंत तक चलेगा, जिसमें कक्षाएं सुबह 8:45 बजे से 11:45 बजे तक लगेंगी। अपना अनुभव साझा करते हुए सोनल ने लिखा, 'हाल ही में हम अपनी 2 साल की बेटी का प्रीस्कूल में दाखिला कराने गए थे, और कार्यक्रम के आधार पर वार्षिक शुल्क लगभग 4,000 डॉलर से 9,000 डॉलर तक था। अच्छी बात क्या है? अधिकतर मामलों में, इस शुल्क में लगभग सब कुछ शामिल होता है, और अतिरिक्त शुल्क बहुत कम होते हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'शुरुआत में यह महंगा लगा। लेकिन जब आप शिक्षक-छात्र अनुपात, सुविधाओं, सीखने के माहौल को देखते हैं और इसकी तुलना अमेरिका में औसत घरेलू आय से करते हैं, तो लागत अधिक उचित लगने लगती है।'
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
इस वीडियो ने जल्द ही ऑनलाइन एक बहस छेड़ दी, जिसमें सोशल मीडिया यूजर्स इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि अमेरिका में प्रीस्कूल की फीस महंगी है या उचित। एक यूजर ने लिखा, 'अच्छी शिक्षा के लिए यह जायज है।'
दूसरे ने लिखा कि, 'वार्षिक शुल्क के हिसाब से यह बहुत ही उचित है, कृपया हर चीज की तुलना रुपये से न करें।'
तीसरे ने लिखा कि, 'लोग अक्सर कीमतों की तुलना करते हैं, लेकिन संदर्भ भी मायने रखता है। आय, शिक्षा की गुणवत्ता और अवसर, ये सभी व्यापक परिदृश्य का हिस्सा हैं। बहुत बढ़िया व्याख्या! इसे इतनी स्पष्टता से समझाने के लिए धन्यवाद। वाकई बहुत जानकारीपूर्ण!'
एक और यूजर ने लिखा कि, 'गुड़गांव में यह और भी ज्यादा है। एक अच्छे स्कूल की फीस 9 लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक होती है।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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