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1.5 करोड़ के फ्लैट में शुद्ध पानी को तरस रहे लोग, 70 लाख के टैंकर बिल के बावजूद मिल रहा ऐसा पानी; वायरल हुई पोस्ट

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : Jun 19, 2026 09:45 am IST,  Updated : Jun 19, 2026 10:31 am IST

Pune Water Crisis Video : सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट काफी वायरल हो रही है। इस पोस्ट में पुणे के उद्यमी ने बताया है कि कैसे उनको 1.5 करोड़ के फ्लैट में गंदा पानी मिल रहा है।

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वायरल पोस्ट में दिखाया गया पानी। Image Source : X/@DEALSDHAMAKA

Pune Water Crisis Video : पुणे के एक उद्यमी ने अपने अपार्टमेंट में कथित तौर पर आपूर्ति किए जा रहे गंदे पानी की तस्वीर साझा करने के बाद शहर में पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई है। एक्स पर विनीत नामक यूजर ने दावा किया कि निवासियों द्वारा पानी के टैंकरों के लिए सालाना लगभग 70 लाख रुपये और फ्लैटों पर एक से 1.5 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद उन्हें अभी भी दूषित दिखने वाले पानी से जूझने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। 

एक्स पर शेयर की पोस्ट 

इस पोस्ट को एक्स पर @DealsDhamaka नामक हैंडल से शेयर किया गया है। विनीत ने भूरे रंग के पानी की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'यह हमारे समाज का इस सप्ताह का पानी है। इसमें कोई प्रिजर्वेटिव नहीं मिलाया गया है, टैंकरों से आने वाले पानी का रंग बिल्कुल ऐसा ही है। यह स्थिति एक गंभीर जन स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करती है। हम पानी के टैंकरों के लिए हर साल लगभग 70 लाख पानी के लिए भुगतान करते हैं, अगर हमारी यही हालत है तो सोचिए रेस्तरां और सड़क किनारे के ढाबों में क्या चल रहा होगा। पुणे में एक खामोश स्वास्थ्य महामारी मंडरा रही है। इस तरह के पानी का इस्तेमाल घरेलू कामों और पीने के लिए करने से बहुत जल्द स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां, त्वचा रोग और जलजनित रोग फैलेंगे। फ्लैट के लिए एक से 1.5 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद ऐसी परिस्थितियों में रहना दयनीय है।'  

यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं

इस पोस्ट ने सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान तेजी से आकर्षित किया और कई लोगों ने पुणे और अन्य शहरों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। एक यूजर ने लिखा कि, 'साफ हवा नहीं, साफ पानी नहीं। मिलावटी खाना। सरकारी चिकित्सा व्यवस्थाएं नाममात्र की हैं। ऐसे में हमें किस प्रगति का जश्न मनाना चाहिए?' 

दूसरे ने लिखा कि, 'यह स्थिति ठाणे, मुंबई और महाराष्ट्र के सभी प्रमुख शहरों में आम है। महाराष्ट्र दिन-ब-दिन महंगा होता जा रहा है। बड़ौदा, इंदौर, बेलगाम, भोपाल जैसे बी या सी श्रेणी के शहरों में जाकर देखिए। वहां जीवन कहीं बेहतर है,” एक अन्य व्यक्ति ने टिप्पणी की।' 

तीसरे ने लिखा ​कि, 'यह देखकर बहुत दुख होता है कि आजादी के 79 साल बाद भी सरकार नियमित रूप से पानी की आपूर्ति नहीं कर पा रही है। समझ नहीं आता कि संपत्ति कर क्यों देना पड़ता है। भारत में कई लोगों के लिए बुनियादी जरूरतें आज भी विलासिता की वस्तु हैं।' 

चौथे ने लिखा कि, 'यह तो वाकई बहुत बुरा है। कर और भूमि पंजीकरण के मामले में तो यह सब जबरन वसूली है, लेकिन जब बदले में कुछ देने की बात आती है तो वह भी जेब से ही देना पड़ता है। कभी-कभी तो मुझे लगता है कि हम वोट क्यों देते हैं?' 

पांचवे ने लिखा कि, 'यह पुणे की दुखद सच्चाई है। मेरी समझ से परे है कि लोग शहर के बाहरी इलाकों में फ्लैट खरीदने के लिए इतनी मोटी रकम क्यों चुका रहे हैं, जहां पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में विकसित किए गए नए इलाके पूरी तरह से पानी के टैंकरों पर निर्भर हैं।' 
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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