रेलवे में काम करने वाले अटेंडेंट्स का काम आसान नहीं होता। यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखने के साथ-साथ उन्हें ट्रेन की संपत्ति की भी सुरक्षा करनी पड़ती है। अगर कोई सामान गायब हो जाए तो उसकी भरपाई अक्सर उनकी सैलरी से कट जाती है। हाल ही में चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन पर हुई एक घटना ने इस बात को फिर साबित कर दिया। एक अटेंडेंट ने सुबह 4 बजे एक यात्री को टॉवेल चोरी करते पकड़ा और उसे सार्वजनिक रूप से बेइज्जत कर दिया।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @deepukushwaha910 नामक हैंडल से शेयर किया गया है। यह घटना 7 अक्टूबर 2026 की सुबह, ट्रेन नंबर 19665 खजुराहो-उदयपुर सिटी एक्सप्रेस में 3एसी कोच की बताई जा रही है। कोच के अटेंडेंट दीपू कुशवाहा थे। ग्वालियर से चित्तौड़गढ़ पहुंचने तक कोच में एक भी टॉवेल नहीं बचा था। अटेंडेंट ने संदेह जताया और यात्रियों के बैग चेक करने को कहा। एक यात्री के बैग में 49, 50, 51 और 52 नंबर के टॉवेल के सेट मिले। अटेंडेंट ने तुरंत यात्री को पकड़ लिया।
‘टॉवेल खरीदने की औकात नहीं..’
वीडियो में अटेंडेंट बेहद आक्रामक नजर आता है। वह यात्री से कहता है, “मेरी सैलरी से कटता है।” वह आगे बोलता है कि एसी में सफर करते हो और टॉवेल खरीदने की औकात नहीं है, इसलिए चोरी करते हो। यात्री सॉरी बोलता है और आराम से बात करने को कहता है, लेकिन अटेंडेंट नहीं मानता। वह जबरदस्ती टॉवेल मांगता है। यात्री एक टॉवेल लौटाता है, जबकि अटेंडेंट का दावा है कि चार टॉवेल गायब हैं। चित्तौड़गढ़ स्टेशन पर अटेंडेंट यात्री को बेइज्जत करता है। यात्री शर्मिंदा होकर वहां से रफूचक्कर हो जाता है। हालांकि इस वीडियो को बाद में डिलीट कर दिया गया।

मगर, एक और वीडियो शेयर किया गया जिस पर लिखा था- 'चादर कंबल ट्रेन से चोरी।'
अटेंडेंट की तारीफ कर रहे यूजर्स
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। लोग अटेंडेंट की हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि जब तक ऐसे लोगों को बार-बार बेइज्जत नहीं किया जाएगा, वे नहीं सुधरेंगे। कुछ ने कहा कि रेलवे की संपत्ति चुराना आम बात हो गई है। चादर, तकिया, ब्लैंकेट और टॉवेल तक चुराए जाते हैं। कई बार 1एसी और 2एसी के यात्री भी इसमें शामिल पाए गए हैं। टॉवेल चुराना सबसे आसान माना जाता है, इसलिए कई ट्रेनों में अब टॉवेल नहीं दिए जाते। गौरतलब है कि, अटेंडेंट दीपू कुशवाहा ने खुद वीडियो शेयर किया। उन्होंने बताया कि ग्वालियर से चित्तौड़गढ़ तक एक भी टॉवेल नहीं बचा था। बैग चेक करने पर चोरी का खुलासा हुआ। रेलवे में अटेंडेंट की सैलरी पहले से ही कम होती है। चोरी का नुकसान उनके वेतन से काट लिया जाता है। इसलिए वे सतर्क रहते हैं।
सिविक सेंस पर उठे सवाल
यह घटना ट्रेन यात्रा में यात्रियों की मानसिकता पर सवाल उठाती है। कुछ लोग छोटी-मोटी चीजें चुराने को हल्के में लेते हैं। लेकिन अटेंडेंट के लिए यह बड़ा नुकसान होता है। सार्वजनिक बेइज्जती से यात्री को सबक मिला। इंटरनेट पर लोग अटेंडेंट को शाबाशी दे रहे हैं और कहते हैं कि ऐसे कदम जरूरी हैं। रेलवे में चोरी की शिकायतें आम हैं। अटेंडेंट्स को अक्सर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस घटना ने दिखाया कि अगर कर्मचारी सतर्क रहें तो चोरों को पकड़ा जा सकता है। वीडियो देखकर कई लोग सहमत हैं कि चोरी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अटेंडेंट की कार्रवाई से अन्य यात्रियों को भी संदेश मिला कि रेलवे की संपत्ति चुराना गलत है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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