मंगलवार, 20 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में बेमौसम बारिश ने दशहरा समारोह में खलल डाल दिया। सीतामऊ में एक अनोखा नजारा देखने को मिला रावण के पुतले को जलाए जाने से ठीक पहले रेनकोट की तरह प्लास्टिक की शीट से ढक दिया गया। हालांकि, बारिश की वजह से यह प्रोग्राम आज कैंसल हो गया। अब ये कार्यक्रम कल होगा। मंदसौर जिले में कई इलाकों में बारिश होने के कारण सीतामऊ नगर परिषद ओर धमनार में तेज बारिश से आज का रावण दहन की आज की जगह कल बुधवार को रावण दहन किया जाएगा। फिलहाल जिले के कई क्षेत्रों में बारिश हो रही है। इससे पहले दिल्ली की रामलीला समिति से एक वीडियो सामने आया, जिसमें 30 फीट ऊंचे कॉकरोच के पुतले का दहन करने की तैयार होती दिख रही है।
रेनकोट वाला रावण
सीतामऊ में आयोजकों ने पारंपरिक 'रावण दहन' की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन पुतला जलाने के ठीक पहले बारिश शुरू हो गई। इस डर से कि पुतला भीग जाएगा और ठीक से नहीं जल पाएगा, नगर परिषद की टीम ने क्रेन की मदद से उसे प्लास्टिक की शीट से ढक दिया। 'रेनकोट पहने' रावण की यह तस्वीर स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई। मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी ही एहतियात बरती गई, जहां आयोजकों ने बारिश के पूर्वानुमान को देखते हुए पुतलों को बचाने के लिए तिरपाल, पीवीसी फ्लेक्स शीट और वाटरप्रूफ सामग्री का इस्तेमाल किया।
कार्यक्रम बुधवार तक के लिए टाल दिया गया
मौसम समय रहते ठीक नहीं हुआ। सीतामऊ नगर परिषद क्षेत्र और धामनार में लगातार भारी बारिश के कारण रावण दहन, जो मूल रूप से मंगलवार को होना था। उसे बुधवार तक के लिए टाल दिया गया। आयोजकों ने बताया कि यह कार्यक्रम तभी होगा, जब मौसम साफ हो जाएगा और पुतला अच्छी तरह सूख जाएगा। मंदसौर जिले के कई हिस्सों में बारिश जारी रही, जिससे दशहरा समितियों को बारिश रुकने का इंतजार करना पड़ा।
सावधानी बरतना जरूरी हो गया
गीले पुतलों को जलाना मुश्किल होता है, क्योंकि नमी के कारण कागज, बांस और अन्य ज्वलनशील सामग्री आसानी से आग नहीं पकड़ पातीं। पिछले कुछ वर्षों में, मध्य प्रदेश में बारिश से भीगे रावण के पुतलों को जलाने के लिए मिट्टी के तेल (केरोसिन) और पेट्रोल जैसे अतिरिक्त ईंधन का इस्तेमाल करना पड़ा था। यही वजह है कि आयोजक पुतलों को ढकने के लिए तुरंत कदम उठाते हैं। भारतीय मौसम विभाग ने राज्य के कुछ हिस्सों में मंगलवार और बुधवार को बारिश का पूर्वानुमान जताया था, जिसके चलते दशहरा समितियों ने पहले से ही वाटरप्रूफ कवर (तिरपाल) का इंतजाम कर लिया था।
त्योहार का उत्साह बरकरार
देरी के बावजूद स्थानीय लोगों और आयोजकों को उम्मीद है कि रावण दहन का कार्यक्रम बुधवार को हो जाएगा। इस घटना से पता चलता है कि अनिश्चित मौसम किस तरह से बहुत सावधानी से योजनाबद्ध किए गए धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्रभावित कर सकता है, जिससे आयोजकों को आखिरी समय में अपनी योजनाओं में बदलाव करना पड़ता है। फिलहाल, सीतामऊ में रावण का पुतला प्लास्टिक से ढका हुआ है।
(स्ट्रिंगर- अशोक परमार)
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