नवरात्र 2026 के उत्सव में स्विट्जरलैंड की भारत में राजदूत माया तिस्साफी ने गुजरात की सांस्कृतिक परंपराओं में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। उन्होंने भाजपा सांसद डॉ. हेमंग जोशी द्वारा आयोजित एक भव्य गरबा कार्यक्रम में भाग लिया, जहां करीब 50,000 लोग जमा हुए थे। रंग-बिरंगी लहंगा चोली पहने माया तिस्साफी ने पारंपरिक ढोल की थाप पर गरबा खेला और इस अनुभव को ‘प्रेरणादायक शाम’ बताया।
एक्स पर शेयर की गई पोस्ट
एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए राजदूत ने लिखा, “कितनी प्रेरणादायक शाम थी, #Navratri की भावना का जश्न, सांसद @drhemangjoshimp द्वारा सुंदर तरीके से आयोजित। उत्सव गरबा के साथ जारी रहा—गुजरात का पारंपरिक लोकनृत्य जो भक्ति, संस्कृति और समुदाय के जीवंत उत्सव में लोगों को एकजुट करता है। करीब 50,000 लोगों के शामिल होने से प्रदर्शित ऊर्जा और एकता सचमुच उल्लेखनीय थी। नवरात्र खूबसूरती से गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पीढ़ियों तथा सीमाओं के पार लोगों को जोड़ने वाली परंपराओं की शक्ति को दर्शाती है। सभी नवरात्र मनाने वालों को हार्दिक शुभकामनाएं! यह त्योहार खुशी, समृद्धि और सुख लाए।”
शेयर करते ही पोस्ट हुई वायरल
माया तिस्साफी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं, जिसमें वे पारंपरिक पोशाक में गरबा खेलती और पूजा में शामिल होती दिख रही हैं। कार्यक्रम में विशाल भीड़ के बीच उनकी उपस्थिति ने विदेशी राजनयिकों की भारतीय संस्कृति के प्रति रुचि को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि नवरात्र सिर्फ नृत्य और संगीत नहीं, बल्कि समुदाय और विरासत का उत्सव है, जो विभिन्न उम्र और संस्कृतियों के लोगों को जोड़ता है। गौरतलब है कि, गुजरात में नवरात्र का मतलब है गरबा और डांडिया रास। रंग-बिरंगी पोशाकों में लोग देवी दुर्गा की आराधना करते हुए नाचते हैं। इस साल का यह कार्यक्रम विशेष इसलिए बना क्योंकि स्विस राजदूत जैसी अंतरराष्ट्रीय हस्ती ने इसमें पूरी तन्मयता से हिस्सा लिया। उनके पोस्ट में स्विट्जरलैंड-भारत संबंधों, संस्कृति, गुजरात पर्यटन और अतुल्य भारत जैसे हैशटैग का इस्तेमाल किया गया।
यूजर्स ने भी की तारीफ
सोशल मीडिया पर इस घटना की व्यापक सराहना हुई। लोग राजदूत के देसी अंदाज और भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान की तारीफ कर रहे हैं। कई ने इसे सांस्कृतिक कूटनीति का बेहतरीन उदाहरण बताया। यह घटना याद दिलाती है कि भारतीय त्योहार सीमाओं से परे लोगों को जोड़ने की शक्ति रखते हैं। स्विस राजदूत की भागीदारी से गुजरात की सांस्कृतिक भावना वैश्विक स्तर पर और चमक उठी है। ऐसे पल भारत की विविधता और मेहमाननवाजी को दुनिया के सामने रखते हैं।
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