Interesting Facts : जब भी आप और हम किसी से मिलते हैं तो प्राय: सबसे पहला शब्द अभिवादन के लिए ही निकलता है। इस दौरान सर्वप्रथम लोग एक-दूसरे से नमस्ते या नमस्कार करते हैं। नमस्ते और नमस्कार को शिष्टाचार का प्रथम नियम माना जाता है जिसका अनुपालन बच्चों को घर-स्कूल जैसी जगहों पर सिखाया जाता है। हालांकि, बड़े लोग अक्सर नमस्ते और नमस्कार दोनों शब्दों को बोलने में एक बड़ी गलती करते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि, 'भला नमस्ते और नमस्कार में कोई क्या गलती कर सकता होगा ?' मगर, गलती नमस्ते और नमस्कार बोलने में नहीं बल्कि, इसका निहितार्थ यानी इन दो शब्दों में छिपे इनके अर्थ को समझने में है। आज हम आपको इसी अंतर के बारे में बताएंगे।
अभिवादन के लिए बोले जाने वाले शब्द
गौरतलब है कि, अभिवादन न केवल एक शब्द है वरन् ये सम्मान और स्नेह व्यक्त करने का एक प्रतीक भी है। इसके अंतर्गत कई तरह के शब्द प्रचलित हैं जो कि अलग-अलग परंपराओं में अलग हैं। मसलन, जब फोन पर किसी से बात करते हैं तो पहले अभिवादन स्वरूप 'हैलो' बोलते हैं जो कि पाश्चात्य संस्कृति का शब्द है। वहीं, भारत में नमस्ते, नमस्कार, प्रणाम, राम-राम, जय श्रीकृष्ण, राधे-राधे और सत श्री अकाल बोला जाता है। वहीं, कुछ अन्य परंपराओं में अस्सलैम वलैकुम, आदाब इत्यादि शब्दों का प्रयोग किया जाता है।
नमस्ते क्या होता है
सबसे पहले तो आपको बता दें कि, नमस्ते दो शब्दों (नम:+ते) से मिलकर बना है जिसमें 'नम:' का अर्थ नमन है और 'ते' का अर्थ 'आप' है। इस प्रकार वाक्य बनता है 'हम आपको नमन करते हैं।' नमस्ते एक वाक्य मात्र है। इसे यानी नमस्ते को एक व्यक्ति को ही किया जा सकता है।
नमस्कार क्या होता है
ध्यान देने वाली बात ये है कि, नमस्कार एक क्रियासूचक शब्द है जो कई लोगों को एक साथ किया जा सकता है। जबकि, नमस्ते एकवचन शब्द है जो एक बार में किसी एक व्यक्ति को ही किया जा सकता है। नमस्कार किसी सभा में बैठे कई लोगों के लिए प्रयुक्त होने वाला अभिवादन संबंधी शब्द है। एक यूट्यूब चैनल @NityānandaMiśra के वक्ता के मुताबिक, जहां नमस्ते दो शब्दों एक वाक्य मात्र है वहीं, नमस्कार एक क्रिया है जो कि तीन प्रकार के होते हैं। नमस्कार के तीन प्रकार इस प्रकार हैं:
- कायिक नमस्कार : यह नमस्कार हाथ जोड़कर या दंडवत होकर किया जाता है।
- वाचिक नमस्कार : यह नमस्कार मुंह से बोलकर नमन करने को कहते हैं।
- मानस नमस्कार : इस नमस्कार में केवल मन ही मन में बिना बोले किसी को नमस्कार कर लिया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि, नमस्ते और नमस्कार के अलावा जितने भी अभिवादन संबंधी शब्द हैं वे सभी शिष्टाचारपूर्ण विकल्प हैं और आवश्यकतानुरूप उनका भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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