मीडिया से बातचीत में दिलीप घोष ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा, कि यह सिर्फ विरोध प्रदर्शन का मंच नहीं है, बल्कि एक शहीद मंच है। उन्होंने सवाल उठाया कि ममता बनर्जी वहां रात भर क्यों बैठी रहीं? आगे उन्होंने कहा, कि वे चाहे रात में बैठें या दिन में, वहां कोई नहीं है। आपने शहीदों, उनके परिवारों साथ ही जनता के साथ धोखा किया है, इसलिए आज आप अकेली खड़ी हैं। दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि 21 जुलाई 1993 को हुई पुलिस फायरिंग में मारे गए लोगों के परिवारों को उनका पूरा मुआवजा नहीं दिया गया, जिसके वो हकदार थे।
उन्होंने कहा, आप इसलिए डरे हुए हैं क्योंकि कोर्ट ने शहीदों के लिए 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था, लेकिन अधिकारियों ने सिर्फ 2 लाख रुपये ही दिए। बाकी के पैसे उन्होंने अपनी जेब में डाल लिए। ये शहीदों के परिवारों के साथ धोखा है। साथ ही, उन्होंने कहा कि 21 जुलाई की गोलीबारी के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा देने के बजाय उन्हें मंत्री, सांसद और विधायक बना दिया गया।
21 जुलाई को क्या हुआ था?
पश्चिम बंगाल में 21 जुलाई को 'शहीद दिवस' के रूप में मनाया जाता है। यह दिन 1993 में लेफ्ट फ्रंट शासन के तहत एक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में मारे गए 13 युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की याद में मनाया जाता है। TMC विधायक संदीपन साहा ने सोमवार को बताया कि उनकी पार्टी यह कार्यक्रम कई सालों से आयोजित करती आ रही है, लेकिन इस बार यह कार्यक्रम उसी मुख्य सड़क पर हो रहा है जहां 1993 में ये घटना घटी थी।
इससे पहले, पश्चिम बंगाल कांग्रेस के प्रेसिडेंट शुभंकर सरकार ने कहा कि पार्टी को 1993 की पुलिस फायरिंग में मारे गए यूथ कांग्रेस वर्कर्स की याद में शहीद मीनार पर श्रद्धांजलि प्रोग्राम करने की ऑफिशियल परमिशन मिल गई है। सरकार ने कहा कि कांग्रेस अपना मेमोरियल प्रोग्राम करेगी, उन्होंने कहा कि जब पीड़ित मारे गए थे, तब वे कांग्रेस का झंडा लिए हुए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि ममता बनर्जी उस झंडे के तहत यह कार्यक्रम नहीं मना रही हैं, जिसके लिए कार्यकर्ताओं ने अपनी जान दी थी। यह बात TMC के अंदर बढ़ते राजनीतिक टकराव के बीच आई है।
(रिपोर्ट - ANI)
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