नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराने के लिए चुनाव आयोग कमर कस ली है। इस संबंध में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू व डॉ. विवेक जोशी ने पश्चिम बंगाल के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस बैठक में चुनाव आयोग ने राज्य में चुनावी हिंसा और गड़बड़ियों को रोकने के लिए जीरो टॉलरेंस की पॉलिसी अपनाने का स्पष्ट निर्देश दिया है।
चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव (CS), पुलिस महानिदेशक (DGP), कोलकाता पुलिस कमिश्नर, मंडलायुक्तों, ADGP, आईजी, जिलाधिकारियों (DMs) और पुलिस अधीक्षकों (SSPs/SPs) को स्पष्ट हिदायत दी है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आयोग का मुख्य उद्देश्य मतदाताओं के मन से भय को पूरी तरह समाप्त करना है।
प्रशासन को इन बिंदुओं पर अमल करने का निर्देश
- भयमुक्त मतदाता- मतदाताओं के लिए ऐसा माहौल तैयार करना जहां वे बिना किसी दबाव या डर के अपने वोट का इस्तेमाल कर सकें।
- हिंसा मुक्त चुनाव- पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा के पुराने इतिहास को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम सुनिश्चित करना।
- धमकी से मुक्ति- किसी भी राजनीतिक दल या असामाजिक तत्व द्वारा मतदाताओं या उम्मीदवारों को डराने-धमकाने पर तुरंत कार्रवाई।
- प्रलोभन पर रोक- चुनाव में शराब, पैसे या अन्य गिफ्ट के जरिए मतदाताओं को लुभाने की कोशिशों को सख्ती से रोकना।
- छप्पा वोटिंग पर लगाम- छप्पा वोटिंग या फर्जी मतदान रोकने के लिए हर बूथ पर कड़ी निगरानी और सुरक्षा बल की तैनाती।
- No Booth Jamming- मतदान केंद्रों पर भीड़ जमा कर मतदान प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिशों को नाकाम करना।
- No Source Jamming- सूचना के स्रोतों या चुनावी तंत्र में किसी भी तरह के बाहरी हस्तक्षेप को रोकना।
बता दें कि पश्चिम बंगाल में दो चरणों में वोटिंग होगी। पहले चरण की वोटिंग 23 अप्रैल को और दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होगी। वहीं वोटों की गिनती चार मई को होगी।