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सात महीने की बच्ची को किडनैप कर किया था दुष्कर्म, कोर्ट ने हैवानियत के लिए दी फांसी की सजा

Edited By: Kajal Kumari @lallkajal Published : Feb 19, 2025 07:01 am IST, Updated : Feb 19, 2025 12:32 pm IST

कोलकाता में एक 37 साल के युवक ने 7 महीने की बच्ची का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया और हत्या का प्रयास किया। अब कोर्ट ने उस हैवान को फांसी की सजा सुनाई है।

सात महीने की मासूम से दुष्कर्म, मिली फांसी की सजा - India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO सात महीने की मासूम से दुष्कर्म, मिली फांसी की सजा

 कोलकाता में एक 37 साल के युवक ने सात महीने की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था और दुष्कर्म के बाद बच्ची को जान से मारने का प्रयास किया था। उस हैवान युवक को अब अदालत ने युवक के इस कृत्य को जघन्य अपराध माना है और उसे  फांसी की सजा सुनाई है। मंगलवार को कोलकाता की बैंकशाल कोर्ट स्थित विशेष पोक्सो कोर्ट ने आरोपित को मौत की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सोमवार को ही आरोपित को दोषी करार दिया था और मंगलवार को उसकी सजा का ऐलान किया है।

इस मामले में अदालत ने कहा कि यह अपराध ‘दुर्लभतम में दुर्लभ’ श्रेणी का है और ऐसे मामलों में अधिकतम सजा देना ही न्यायसंगत होगा। अभियोजन पक्ष ने भी कोर्ट से आग्रह किया था कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषी को मृत्युदंड दिया जाना चाहिए।

मात्र 75 दिनों के भीतर कोर्ट ने सुना दिया फैसला

जघन्य अपराध की यह घटना कोलकाता के बड़तल्ला इलाके की है, जहां 30 नवंबर 2024 में आरोपी राजीव घोष सात महीने की मासूम बच्ची को किडनैप कर ले गया था और उसके साथ इस घिनौनी वारदात को अंजाम देकर फरार हो गया था। पुलिस ने उसे पांच दिसंबर को झाड़ग्राम जिले के गोपीबल्लभपुर से गिरफ्तार किया था। पांच दिसंबर को ही उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया था। पुलिस ने 30 दिसंबर को पहली चार्जशीट दाखिल की और उसके कुछ ही दिनों बाद पूरक चार्जशीट भी प्रस्तुत कर दी। मात्र 75 दिनों के भीतर कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई पूरी कर सजा का ऐलान कर दिया है।

छह महीने में सात लोगों को फांसी की सजा

जानकारी के मुताबिक पीड़िता बच्ची का अब भी कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में इलाज चल रहा है। बता दें कि छह महीने में पश्चिम बंगाल में यह सातवीं फांसी की सजा सुनाई गई है। यह पश्चिम बंगाल में पिछले छह महीनों के भीतर अदालत द्वारा सुनाई गई सातवीं मौत की सजा है। वहीं पोक्सो कानून के तहत यौन अपराध के मामले में यह छठा मृत्युदंड है।

 

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