कोलकाता: पश्चिम बंगाल में माओवादी उग्रवाद के खिलाफ एक बड़ी सफलता मिली है। माओवादी दंपति मंगल महतो उर्फ समीर और उसकी पत्नी मालती मुर्मू ने आज कोलकाता पुलिस मुख्यालय, लाल बाजार में आत्मसमर्पण कर दिया। दोनों लंबे समय से झारखंड और जंगलमहल इलाके में सक्रिय थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मंगल और मालती दोनों ही मूल रूप से पश्चिम बंगाल के निवासी हैं। मंगल का घर पश्चिम मेदिनीपुर के शालबनी में है, जबकि मालती झाड़ग्राम के गोपीबल्लभपुर की रहने वाली हैं। बाद में दोनों झारखंड में सक्रिय हो गए। मंगल पहले दलमा इलाके में और फिर सारंडा में माओवादी गतिविधियों से जुड़ा था। बाद में मालती भी झाड़ग्राम छोड़कर सारंडा चली गईं और संगठन में सक्रिय हो गईं।
लाल बाजार में आत्मसमर्पण
कोलकाता के पुलिस कमिश्नर अजय नंदा ने बताया कि 2010-11 के बाद मंगल झारखंड चला गया था। इससे पहले 2010 में वह माओवादियों के संगठन में शामिल हुआ था। उस समय शालबनी में 'जनसाधारण कमेटी' काफी सक्रिय थी। वह माओवादी नेता किशनजी का करीबी भी रहा है। पुलिस का कहना है कि सारंडा में टिके रहना मुश्किल होने के कारण जनवरी 2026 में माओवादियों ने इलाका छोड़ना शुरू कर दिया। इस सूची में पश्चिम बंगाल के करीब 13 लोग थे, जो अलग-अलग समय पर अलग-अलग जगहों पर गिरफ्तार हुए हैं।
बंगाल के कई माओवादी कर चुके हैं सरेंडर
हाल ही में झारखंड से ही तीन माओवादियों को गिरफ्तार किया गया है। कुछ महीने पहले कोलकाता में पुष्पा नाम की महिला माओवादी ने आत्मसमर्पण किया था, जबकि बेला को गिरफ्तार किया गया था। अब मंगल और मालती ने भी आत्मसमर्पण कर दिया है। झारखंड पुलिस ने मंगल पर 5 लाख रुपये और मालती पर 2 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। दोनों ने जनवरी 2026 के बाद इलाका छोड़ने और मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया था।
पुलिस के अनुसार, वे माओवादी नेताओं सारंगदा और आकाश के साथ जुड़े हुए थे और झाड़ग्राम इलाके में काम करते थे। फिलहाल दोनों से लाल बाजार में पूछताछ की जा रही है और आगे की कानूनी प्रक्रिया चल रही है। पश्चिम बंगाल में माओवादी दंपति मंगल महतो (समीर) और मालती मुर्मू ने आत्मसमर्पण कर दिया है। माओवादी समूह के सक्रिय सदस्य मंगल और मालती 2010-11 से पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम जिले से झारखंड में शिफ्ट होकर काम करते थे।
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