पश्चिम बंगाल के कथित पीडीएस घोटाले से जुड़े मामले में ईडी ने शनिवार को कई ठिकानों पर छापेमारी की। मनी लॉड्रिंग की जांच के तहत शनिवार को कोलकाता और बर्धमान में कई स्थानों पर छापेमारी की गई। अधिकारियों ने बताया कि कोलकाता, बर्धमान और हाबरा में निरंजन चंद्र साहा समेत आपूर्तिकर्ताओं और निर्यातकों के लगभग नौ परिसरों पर तलाशी अभियान जारी है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत की जा रही है। ईडी ने इस मामले में पहले भी छापेमारी की थी। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को मतदान होना है। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को हुआ था।
धन शोधन का यह मामला अक्टूबर 2020 में बसीरहाट पुलिस द्वारा घोजाडांगा स्थित सीमा शुल्क उपायुक्त की शिकायत पर दर्ज की गई प्राथमिकी से जुड़ा है। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि कल्याणकारी योजनाओं के लिए निर्धारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गेहूं की बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है। गेहूं को आपूर्तिकर्ताओं, लाइसेंस प्राप्त वितरकों, डीलर और बिचौलियों की मिलीभगत से अवैध माध्यमों से कम कीमत पर खरीदा गया।
पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं कई आरोपी
ईडी का दावा है कि स्पालई चेन से बड़ी मात्रा में गेहूं को अवैध रूप से निकालकर कई स्थानों पर जमा किया गया था। अनाज को मूल रूप से कहां से प्राप्त किया गया, इसकी जानकारी छिपाने के लिए आरोपियों ने भारतीय खाद्य निगम और राज्य सरकार के चिह्नों वाले मूल बोरे हटा दिए या उलट दिए और उन्हें फिर से भर दिया और इस तरह पहचान संबंधी चिह्नों को छिपाकर पीडीएस के गेहूं को खुले बाजार में बेचने या निर्यात करने के लिए वैध भंडार के रूप में पेश किया गया। इस मामले में पश्चिम बंगाल के पूर्व खाद्य मंत्री ज्योति प्रिय मलिक और कुछ अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
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