पश्चिम बंगाल के रानीगंज में रेलवे लाइन विस्तार के लिए सोमवार दोपहर रानीगंज के साहेबगंज में प्रशासन की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। बाईपास के किनारे बुलडोजर चलाकर एक मकान को पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल के साथ केंद्रीय बलों की भी तैनाती की गई थी।
बताया जा रहा है कि रेलवे लाइन विस्तार के लिए साहेबगंज सहित आसपास के विस्तृत इलाके की जमीन पहले ही रेलवे द्वारा अधिग्रहित की जा चुकी है। अधिग्रहित जमीन का अधिकांश हिस्सा खाली कराया जा चुका है, लेकिन कुछ मकान अभी भी मौजूद थे। सोमवार को इन्हीं में से एक मकान को प्रशासन ने बुलडोजर से गिरा दिया।
हालांकि, मकान मालिक का आरोप है कि उन्हें अब तक जमीन और मकान का पूरा मुआवजा नहीं मिला है, इसके बावजूद उन्हें घर खाली करने के लिए मजबूर किया गया। वहीं, प्रशासन की ओर से अधिग्रहित जमीन को खाली कराने की प्रक्रिया के तहत ही कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है।
सोमवार दोपहर अचानक मकान के सामने बुलडोजर पहुंचा। मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। रेलवे की ओर से केंद्रीय बलों की तैनाती की गई थी। पुलिस, प्रशासन, रेलवे और केंद्रीय बलों की कड़ी सुरक्षा के बीच मकान तोड़ने की कार्रवाई शुरू हुई।
बुलडोजर की पहली चोट के साथ ही मकान की दीवारें हिलने लगीं और कुछ ही देर में पूरा मकान मलबे में तब्दील हो गया। अपनी आंखों के सामने घर को टूटता देखकर मकान मालिक और उनके परिवार के सदस्य बेहद असहाय नजर आए।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी और सवाल उठने लगे हैं। लोगों का सवाल है कि अगर मुआवजे को लेकर मकान मालिक की आपत्ति है, तो उसका पूरी तरह निपटारा होने से पहले ही आखिर मकान खाली क्यों कराया गया?
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, रेलवे लाइन विस्तार का काम तेजी से आगे बढ़ाने के लिए अधिग्रहित जमीन को खाली कराया जा रहा है। ऐसे में मकान मालिक के मुआवजा नहीं मिलने के दावे और रेलवे-प्रशासन की कार्रवाई के बीच साहेबगंज में मकान तोड़े जाने की घटना ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।
(रिपोर्ट- बिज्जू मंडल)
ये भी पढ़ें-
पश्चिम बंगाल सरकार ने उठाया बड़ा कदम, अब हफ्ते के दो दिन सरकारी कार्यालयों में भी लगेगा जनता दरबार