पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल पूरी तरह से गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी इस बार पूरे दमखम के साथ मैदान में उतर चुकी है। इसी कड़ी में गोरखपुर से सांसद और लोकप्रिय अभिनेता रवि किशन ने हावड़ा में जोरदार रोड शो किया, जिससे राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है। हावड़ा में आयोजित प्रचार अभियान के दौरान रवि किशन ने आत्मविश्वास से भरा बयान देते हुए कहा कि 4 मई के बाद पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनना तय है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की जनता अब बदलाव चाहती है और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासन से मुक्ति की ओर देख रही है।
TMC की गुंडागर्दी से आजादी चाहता है बंगाल
अपने संबोधन में रवि किशन ने टीएमसी पर तीखे हमले करते हुए कहा कि लोग कथित “गुंडागर्दी, भय और अपराध” के माहौल से आजादी चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में जनता डर, आतंक, किडनैपिंग और अपराध जैसी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए वोट कर रही है।
रोड शो में बवाल: BJP और TMC कार्यकर्ताओं में भिड़ंत
रवि किशन का यह रोड शो उस समय विवादों में आ गया जब कुछ कथित टीएमसी कार्यकर्ताओं ने जुलूस के बीच पहुंचकर हंगामा शुरू कर दिया। आरोप है कि इस दौरान बीजेपी के झंडे फाड़े गए और नारेबाजी कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश हुई। हालांकि, स्थिति को संभालते हुए रवि किशन ने अपने समर्थकों को शांत रहने की अपील की और रोड शो जारी रखा। उन्होंने गाड़ी से ही “हर-हर महादेव” के नारे लगाए और समर्थकों को आगे बढ़ने का निर्देश दिया। घटना के बाद रवि किशन ने कहा कि यह सब विपक्ष की हताशा का संकेत है। उनके अनुसार, जब हार सामने दिखती है तो इस तरह की स्थिति पैदा की जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “बंगाल की जनता परिवर्तन चाहती है और अब कोई गुंडागर्दी नहीं चलेगी।
बंगाल की राजनीति में पूर्वांचली वोट बैंक की अहम भूमिका
पश्चिम बंगाल में बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड से आए प्रवासी लोगों का एक बड़ा और प्रभावशाली समुदाय मौजूद है, जिन्हें आमतौर पर “पूर्वांचली” कहा जाता है. पश्चिम बंगाल में पूर्वांचली समुदाय की अनुमानित आबादी लगभग 50 से 70 लाख मानी जाती है। यह राज्य की कुल आबादी का करीब 5-7 प्रतिशत हिस्सा है।
कोलकाता और हावड़ा: सबसे बड़ा प्रवासी केंद्र
राज्य में सबसे अधिक पूर्वांचली आबादी कोलकाता और हावड़ा क्षेत्र में पाई जाती है। यहां लगभग 12–15 लाख लोग रहते हैं। ये लोग मुख्य रूप से गार्डनरीच, मेटियाब्रुज, बड़ाबाजार, लिलुआ और सालकिया जैसे इलाकों में बसे हैं और व्यापार, ट्रांसपोर्ट व श्रमिक क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
आसनसोल-दुर्गापुर: औद्योगिक क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति
पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल–दुर्गापुर औद्योगिक क्षेत्र में भी पूर्वांचली समुदाय की बड़ी मौजूदगी है। यहां लगभग 10–12 लाख लोग रहते हैं, जो मुख्य रूप से कोयला और इस्पात उद्योगों में कार्यरत हैं।
सिलीगुड़ी: व्यापार और संपर्क का प्रमुख केंद्र
उत्तर बंगाल का सिलीगुड़ी क्षेत्र भी पूर्वांचली आबादी का महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां लगभग 6–8 लाख लोग बसे हुए हैं। यह क्षेत्र उत्तर-पूर्व भारत का प्रमुख व्यापारिक हब होने के कारण रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
उत्तर 24 परगना: चुनावी समीकरणों में निर्णायक भूमिका
उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों में भी पूर्वांचली समुदाय की अच्छी खासी आबादी मौजूद है, जो लगभग 8–10 लाख के आसपास मानी जाती है। यह इलाका कई विधानसभा सीटों पर चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।