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पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से माइक्रोफोन हटाने पर विवाद, विधायक नौशाद सिद्दीकी ने डीजीपी को लिखा पत्र

 Reported By: Onkar Sarkar Written By: India TV West Bengal Bureau Desk
 Published : Aug 05, 2026 10:39 pm IST,  Updated : Aug 05, 2026 11:13 pm IST

पश्चिम बंगाल में माइक्रोफोन के इस्तेमाल को लेकर नया विवाद सामने आया है। राज्य के कई जिलों में मस्जिदों से माइक्रोफोन हटाए जाने की खबरों के बीच नौशाद सिद्दीकी ने डीजीपी को पत्र लिखकर पुलिस पर बिना नोटिस कार्रवाई करने और लोगों को धमकाने का आरोप लगाया है।

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नॉइज पॉल्यूशन पर कार्रवाई Image Source : REPORTER INPUT

पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से माइक्रोफोन हटाए जाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने पुलिस पर बिना नोटिस कार्रवाई करने और मस्जिद समितियों को धमकाने का आरोप लगाते हुए डीजीपी को पत्र लिखा है। वहीं, नाखोदा मस्जिद के इमाम ने कहा है कि वे सुप्रीम कोर्ट और कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेशों का पालन करेंगे, लेकिन पुलिस की ओर से दिए जा रहे दबाव को गलत बताया है। मस्जिद प्रबंधन का कहना है कि वे अदालत के आदेशों का पालन करेंगे, लेकिन पुलिस की कार्रवाई उचित प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए। इस बीच राज्य में ध्वनि प्रदूषण नियमों के पालन और पुलिस की कार्रवाई को लेकर बहस तेज हो गई है।

नॉइज पॉल्यूशन पर कार्रवाई

स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड अब पश्चिम बंगाल में माइक्रोफोन से होने वाले नॉइज पॉल्यूशन पर कंट्रोल कर रहा है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने साल 2,000 में नॉइज पॉल्यूशन को कंट्रोल करने के लिए एक ऑर्डर जारी किया था। इस ऑर्डर में कहा गया था कि सुबह 6 बजे से पहले और रात 10 बजे के बाद पब्लिक में माइक्रोफोन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। बाकी दिन माइक्रोफोन इस्तेमाल करने के लिए पुलिस से परमिशन लेनी होगी। हालांकि, उस मामले में भी साउंड लिमिटर का इस्तेमाल जरूरी है। दिन में इंडस्ट्रियल एरिया में नॉइज लिमिट 70 डेसिबल, कमर्शियल एरिया में 65 और रेजिडेंशियल एरिया में 55 डेसिबल से ज्यादा नहीं होगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ऐलान किया था ऑर्डर का पालन किया जाना चाहिए। 

मस्जिदों में माइक हटाने पर बवाल

राज्य के कई जिलों में मस्जिदों से माइक्रोफोन हटाए जाने की तस्वीरें सामने आ रही हैं। इस बारे में भांगर विधानसभा में इंडियन सेक्युलर फ्रंट के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने बंगाल के डीजीपी को एक लेटर लिखकर आरोप लगाया है कि जिले में पुलिस जबरदस्ती माइक्रोफोन हटा रही है। विधायक ने इस मामले का विरोध करते हुए लेटर लिखा है। साथ ही उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। इस बारे में कोलकाता की नाखोदा मस्जिद के इमाम ने कहा कि, हम सुप्रीम कोर्ट और कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश को मान कर चलेंगे लेकिन पुलिस के तरफ से धमकाया जा रहा है। ये सही नहीं है। 

हालांकि, इस बारे में टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने टिप्पणी करने से मना कर दिया। 

विधायक ने डीजीपी को लिखा पत्र

नौशाद सिद्दीकी ने लेटर में लिखकर कहा, "महोदय, राज्य के कई जिलों से हमें सूचना मिल रही है कि स्थानीय पुलिस विभिन्न मस्जिदों में जाकर बिना किसी कानूनी नोटिस के मस्जिद समिति के सदस्यों को धमका कर माइक्रोफोन हटा रही है। कुछ क्षेत्रों से यह भी सूचना मिल रही है कि माइक्रोफोन पर फज्र की अजान देने से मना करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इस बीच, सरकार के निर्देशों के अनुसार, ध्वनि प्रदूषण (नियमन एवं नियंत्रण) अधिनियम के तहत मस्जिदों के माइक्रोफोन्स की ध्वनि कम कर दी गई है। लेकिन अब पुलिस अधिकारियों के इस दमनकारी व्यवहार से लोगों में दहशत, चिंता और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।"

उन्होंने कहा "यदि किसी विशेष मामले में ध्वनि प्रदूषण की शिकायत हो, तो विधिवत कानूनी प्रक्रिया, नोटिस, सुनवाई का अवसर आदि के बाद ही कार्रवाई की जानी चाहिए: किसी भी स्थिति में धार्मिक संस्थानों के विरुद्ध मौखिक आदेश या बल प्रयोग द्वारा कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। यह स्पष्ट है कि पुलिस का यह व्यवहार देश के संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 25 से 28 में निहित मौलिक अधिकारों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है, जिनमें नागरिकों के धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का विशेष महत्व है।"

आगे उन्होंने लिखा "इसलिए, हम आपसे जानना चाहते हैं कि क्या आपने इस संबंध में कोई निर्देश जारी किए हैं? यदि हां, तो कृपया हमें उस निर्देश की एक प्रति भेजें। इसके साथ ही, मस्जिद समितियों को भी यह प्रति दी जानी चाहिए। यदि पुलिस अपने अधिकार का दुरुपयोग करती है और मनमानी करती है, तो हम जांच के साथ तत्काल कार्रवाई की मांग करते हैं। भविष्य में इस तरह के अवैध और मनमाने कदम न उठाए जाएं, इसके लिए एक स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की जानी चाहिए। हमें आशंका है कि ऐसी गतिविधियों से सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ सकता है। कृपया इस मामले को गंभीरता से देखें और तत्काल कार्रवाई करें।"

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