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बंगाल में रेप और हत्या मामले में 6 महीने में 7 दोषियों को मौत की सजा, लिस्ट में आरजी कर केस नहीं

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Feb 19, 2025 07:02 pm IST,  Updated : Feb 19, 2025 07:09 pm IST

पश्चिम बंगाल में अपराधियों को मृत्युदंड की सुजा देने का सिलसिला करीब दो दशक बाद वापस आया है। पिछले छह महीने में बंगाल की अदालतों ने सात दोषियों को मौत की सजा सुनाई है।

प्रतीकात्मक फोटो- India TV Hindi
प्रतीकात्मक फोटो Image Source : REPRESENTATIVE IMAGE

कोलकाता आरजी कर मेडिकल कॉलेज केस के बाद से पश्चिम बंगाल में रेप और हत्या के मामले पर सख्ती बरती गई है। बीते छह महीने में पश्चिम बंगाल की अदालतों ने नाबालिग लड़कियों से रेप और हत्या के मामलों में छह दोषियों को मौत की सजा सुनाई है, जबकि एक अन्य मामले में अपने परिवार के सदस्य की हत्या करने वाले दोषी को भी मृत्युदंड की सजा दी गई। इस तरह राज्य में पिछले छह महीने में मृत्युदंड की सजा पाने वालों की संख्या 7 हो गई है। इनमें से 6 मामले ऐसे थे, जिन्हें लड़कियों से रेप और हत्या के 'दुर्लभ' मामलों की श्रेणी में रखा गया है। इन सभी मामलों में आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और यौन अपराध से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए थे।

आरजी कर केस में क्या आया फैसला?

हालांकि, इस लिस्ट में कोलकाता आरजी कर मेडिकल कॉलेज केस शामिल नहीं है। कोलकाता की एक अदालत ने 9 अगस्त, 2024 को आरजी कर अस्पताल में तैनात एक ट्रेनी महिला डॉक्टर के साथ के बाद जघन्य हत्या के मामले में दोषी को मौत की सजा नहीं दी। अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा, 14 वर्षीय कक्षा आठ की छात्रा की संदिग्ध बलात्कार और हत्या का मामला भी इस सूची में नहीं है। पुलिस ने इस मामले में 22 वर्षीय ई-रिक्शा चालक को गिरफ्तार किया है और किशोरी का क्षत-विक्षत शव कोलकाता के न्यू टाउन इलाके में 7 फरवरी को मिला था।

करीब दो दशक बाद फिर से मृत्युदंड 

बंगाल में मृत्युदंड का यह सिलसिला करीब दो दशक बाद वापस आया है। पश्चिम बंगाल में आखिरी बार 2004 में दक्षिण कोलकाता के सुरक्षा गार्ड धनंजय चटर्जी को 16 वर्षीय छात्रा से रेप और हत्या के मामले में फांसी दी गई थी। यह अपराध मार्च 1990 में हुआ था। इसके बाद राज्य में कोई अन्य मृत्युदंड का मामला सामने नहीं आया था।

सितंबर से फरवरी के बीच फैसला

इस साल सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच हुए ये फैसले एक कड़े संदेश के तौर पर उभर कर सामने आए हैं। 7 सितंबर 2023 को सिलीगुड़ी की पॉक्सो अदालत ने मोहम्मद अब्बास को मौत की सजा सुनाई। उसे अगस्त 2023 में माटीगारा इलाके में स्कूल जा रही 16 वर्षीय लड़की से बलात्कार और हत्या का दोषी पाया गया था। इस फैसले का स्वागत करते हुए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने कहा कि यह त्वरित सजा पश्चिम बंगाल पुलिस के प्रयासों का प्रमाण है, जिसने एक साल के भीतर न्याय सुनिश्चित किया। पार्टी ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर लिखा, “‘अपराजिता बलात्कार विरोधी विधेयक’ के लागू होने से इस तरह की कठोर सजाएं एक मिसाल बनेंगी, अपराधियों में डर पैदा करेंगी और ऐसे जघन्य अपराधों को रोका जा सकेगा।” (इनपुट- भाषा)

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