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West Bengal Assembly Elections 2026: दार्जिलिंग में गोरखा समस्या के लिए क्या है बीजेपी का संकल्प? अमित शाह ने शेयर किया विजन

 Published : Apr 15, 2026 02:27 pm IST,  Updated : Apr 15, 2026 02:27 pm IST

गृह मंत्री अमित शाह ने वीडियो संदेश के जरिए दार्जिलिंग में गोरखा नेताओं पर दर्ज केस वापस लेने और सत्ता में आने पर समस्या के स्थायी समाधान का आश्वासन दिया है।

Amit shah- India TV Hindi
अमित शाह Image Source : PTI

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी को मात देने के लिए बीजेपी इस बार पूरा दमखम लगा रही है। इसी कड़ी मेंकेंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग क्षेत्र के लिए भाजपा का बड़ा विजन शेयर किया है। बुधवार को एक वीडियो संदेश के माध्यम से सभा को संबोधित करते हुए शाह ने स्पष्ट किया कि राज्य में भाजपा की सत्ता आने पर दार्जिलिंग के गोरखा मुद्दे का समाधान उनकी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल होगा।

मुकदमे वापस लेने का वादा

मौसम खराब होने के चलते अमित शाह पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक लेबोंग नहीं पहुंच पाए। इसलिए उन्होंने जनता के लिए वीडियो संदेश शेयर किया। उन्होंने कहा कि पिछले आंदोलनों के दौरान गोरखा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर दर्ज किए गए सभी पुलिस केस को बीजेपी सरकार बनते ही वापस ले लिया जाएगा। उन्होंने गोरखा समुदाय को भरोसा दिलाया कि उनके साथ न्याय किया जाएगा।

गोरखा मुद्दे का जल्द से जल्द समाधान

उन्होंने कहा, "आज आपसे नहीं मिल पाने का मुझे गहरा खेद है। लेकिन मैं आपसे वादा करता हूं कि 21 अप्रैल को कुर्सियोंग के सुकना में होने वाली निर्धारित जनसभा में मैं आपसे प्रत्यक्ष तौरपर मिलूंगा, जहां मैं दार्जिलिंग के लोगों के लिए हमारी विकास योजनाओं पर विस्तार से चर्चा करूंगा।" उन्होंने कहा, ''फिलहाल मैं इतना ही कहूंगा कि बंगाल में सरकार बनने के बाद हमारी प्राथमिकता गोरखा मुद्दे का जल्द से जल्द समाधान करना होगी। सत्ता में आने के बाद हम गोरखा नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ लंबित सभी पुलिस मामलों को वापस ले लेंगे।" भाजपा के पूर्व अध्यक्ष शाह ने कहा कि चुनाव से पहले राज्य भर में हुई सभाओं के बाद उन्हें पूरा विश्वास है कि भाजपा पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को हरा देगी। 

राजनीति के केंद्र में रही है गोरखालैंड की मांग

दार्जिलिंग पहाड़ियों में रहने वाले नेपाली भाषी भारतीयों की दशकों पुरानी गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर अतीत में कई हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं। वर्ष 2011 में दार्जिलिंग के ऊपरी इलाकों और तलहटी के कुछ हिस्सों के प्रशासन के लिए अर्ध-स्वायत्त गोरखालैंड प्रादेशिक प्रशासन (जीटीए) के गठन के बावजूद, 2017 तक हिंसक आंदोलन होते रहे। इस क्षेत्र में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) और गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) जैसी स्थानीय गोरखा पार्टियों तथा भाजपा और तृणमूल कांग्रेस जैसे बड़े राजनीतिक दलों के बीच राजनीतिक गठबंधन में कई उतार-चढ़ाव आए हैं, जहां अलग गोरखालैंड की मांग हमेशा से राजनीतिक केंद्र में रही है। 

आगामी चुनाव में, तृणमूल कांग्रेस ने बिमल गुरुंग की जीजेएम से अलग हुए गुट, अनित थापा के नेतृत्व वाली भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजेपीएम) के साथ रणनीतिक  गठबंधन किया है। तृणमूल कांग्रेस ने दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और कुर्सियोंग की सीट अपने सहयोगी दल के लिए छोड़ दी हैं। दूसरी ओर, भाजपा ने एक बार फिर गुरुंग का समर्थन हासिल किया है, हालांकि इस बार भाजपा इस क्षेत्र से सीधे चुनाव लड़ रही है। दार्जिलिंग में मतदान 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के पहले चरण में होगा। दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा, जिसके बाद 4 मई को मतगणना होगी। 

 

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