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क्या होता है 'स्ट्रॉन्ग रूम', कैसे होती है इसकी सुरक्षा? जिसे लेकर बंगाल में मचा है बवाल

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : May 03, 2026 01:12 pm IST,  Updated : May 03, 2026 01:15 pm IST

पश्चिम बंगाल में स्ट्रॉन्ग रूम पर बवाल मचा है। यह विवाद 30 अप्रैल दोपहर से शुरू हुआ और शाम आते-आते कई जगहों पर TMC और BJP के नेता, उनके समर्थक और प्रशासन-पुलिस के बीच बहस की वजह बन गया।

 स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर बंगाल में विवाद- India TV Hindi
स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर बंगाल में विवाद Image Source : ANI/PTI

पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान के बाद EVM और पोस्टल बैलेट बॉक्स को रखने वाले स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर विवाद शुरू हो गया। दरअसल, दूसरे चरण में राज्य की 142 सीटों पर मतदान संपन्न होने के बाद 4 मई को होने वाली मतगणना का इंतजार है। इस बीच, स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे। 

यह विवाद 30 अप्रैल दोपहर से शुरू हुआ और शाम आते-आते कई जगहों पर TMC और BJP के नेता, उनके समर्थक और प्रशासन-पुलिस के बीच बहस की वजह बन गया। TMC के नेताओं ने प्रशासन और पुलिस पर 'धांधली' का आरोप लगाते हुए स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा पर संदेह जताया है। वहीं, बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि हार के डर से ममता बनर्जी की पार्टी बहानेबाजी कर रही है। गुरुवार से शुरू हुआ यह विवाद बहस और हंगामे के साथ पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया है। ये सारा विवाद स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर हुआ है। ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या होता है स्ट्रॉन्ग रूम और इसे लेकर चुनाव आयोग के क्या दिशा-निर्देश हैं?

क्या होता है स्ट्रॉन्ग रूम?

आसान शब्दों में कहें तो स्ट्रॉन्ग रूम चुनाव आयोग का वह 'सुरक्षित किला' है, जहां लोकतंत्र की किस्मत यानी EVM, VVPAT और चुनावी दस्तावेजों को कैद करके रखा जाता है। मतदान केंद्र से मशीनें वापस आने के बाद और गिनती शुरू होने तक, मशीनों को किसी भी तरह की छेड़छाड़ या अनधिकृत पहुंच से बचाना है। ये आमतौर पर जिला मुख्यालय या सुरक्षित सरकारी भवनों में बनाए जाते हैं, जो जिला निर्वाचन अधिकारी या रिटर्निंग ऑफिसर के नियंत्रण में होते हैं।

कैसे होती है निगरानी?

स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा किसी अभेद्य किले से कम नहीं होती। इसके लिए चुनाव आयोग ने कड़े प्रोटोकॉल बनाए हैं-

  1. स्ट्रॉन्ग रूम में प्रवेश के लिए केवल एक ही दरवाजा होता है। बाकी सभी खिड़कियों और दरवाजों को ईंटों या कंक्रीट से पूरी तरह सील कर दिया जाता है।
  2. कमरे का ताला 'डबल लॉक' होता है। इसकी एक चाबी जिला निर्वाचन अधिकारी के पास और दूसरी रिटर्निंग ऑफिसर के पास होती है, ताकि कोई अकेला व्यक्ति इसे न खोल सके।
  3. यहां 24 घंटे त्रि-स्तरीय सुरक्षा होती है। अंदरूनी घेरे में केंद्रीय अर्धसैनिक बल (CAPF) और बाहरी घेरे में राज्य पुलिस तैनात रहती है।
  4. सीसीटीवी कैमरे हर सेकंड की फुटेज रिकॉर्ड करते हैं। उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों को स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर बने कंट्रोल रूम से फुटेज देखने की अनुमति होती है।
  5. कमरे के पास आने वाले हर व्यक्ति का नाम, समय और आने का कारण एक लॉगबुक में दर्ज किया जाता है।

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