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बलूचिस्तान को लेकर भड़का EU, पाक पर प्रतिबंध की चेतावनी

 Written By: India TV News Desk
 Published : Sep 24, 2016 07:58 am IST,  Updated : Sep 24, 2016 02:46 pm IST

भारत का आजादी की मांग कर रहे बलूचिस्तान के लोगों के साथ खड़ा होना पाकिस्तान को भारी पड़ने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उठाए गए वहां के मानवाधिकार उल्लंघन को यूरोपीय यूनियन (ईयू) ने गंभीरता से लिया है।

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जिनेवा: भारत का आजादी की मांग कर रहे बलूचिस्तान के लोगों के साथ खड़ा होना पाकिस्तान को भारी पड़ने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उठाए गए वहां के मानवाधिकार उल्लंघन को यूरोपीय यूनियन (ईयू) ने गंभीरता से लिया है। बलूचिस्तान के लोगों के साथ एकजुटता दिखाते हुए यूरोपीय यूनियन के उपाध्यक्ष यिसजार्ड जारनेकी ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान बलूचिस्तान में मानवाधिकार को नहीं रोक पाया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

जारनेकी यहां बलूचों पर अत्याचार के विरोध में निकाले गए एक प्रदर्शन में भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए अब बयानबाजी की जगह कार्रवाई की जरूरत है। अगर वह बलूचिस्तान के प्रति अपनी नीति नहीं बदलेगा तो ईयू का उसके प्रति रुख बदल जाएगा और उससे तमाम दुश्वारियों का सामना करना पड़ेगा।

उन्होंने पाकिस्तान को लताड़ते हुए कहा, एक ओर तो पाकिस्तान पूरी दुनिया में अपनी स्वच्छ छवि दिखाता है और दूसरी ओर बलूचिस्तािन में मानवाधिकार का खुला उल्लंघन कर रहा है। जारनेकी ने माना कि पाकिस्तानी सरकार सेना के अधीन काम करती है। सेना जैसा चाहती है वैसी सरकार को काम करना पड़ता है। उन्होंने यूरोपीय संघ के सभी 28 देशों से पाकिस्तान की बलूच जनता के प्रति नीति पर ध्यान देने को कहा।

बता दें, प्रधानमंत्री मोदी ने इसी साल 15 अगस्त को लाल किले से अपनी स्पीच में बलूचिस्तान का मसला उठाया था। इसके बाद बलूचिस्तान में आजादी समर्थक अब तक कई बार पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन कर चुके हैं। बलूचिस्तान में न केवल कई बार भारत का राष्ट्रीय झंडा तिरंगा लहराया गया है बल्कि लोगों ने बलूचिस्तान के शहीद माने जाने वाले दिवंगत नेता अकबर बुगती के साथ पीएम मोदी की फोटो भी लहराई है।

भारत ने कुछ दिनों पहले जिनेवा में यूनाइटेड नेशन्स ह्यूमन राइट्स काउंसिल के 33rd सेशन में भी बलूचिस्तान का मुद्दा उठाया था। उसी दौरान न्यूयॉर्क में यूएन हेडक्वार्टर्स के बाहर पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन हुआ था और 'बलूचिस्तान दूसरा बांग्लादेश' के नारे भी गूंजे थे।

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