दुबई: कतर की राजधानी दोहा पर एक दिन पहले इजरायली सेना के हमले ने उसके खाड़ी सहयोगियों को भी चौंका दिया है। इस हमले के साथ ही अमेरिका के साथ रिश्तों की भी अग्निपरीक्षा शुरू हो गई है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है।
इजरायल को लेकर क्या बोले ट्रंप?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कतर में हमास अधिकारियों पर इज़रायल के हमले के बाद एक नाज़ुक संतुलन साधने की कोशिश की। उन्होंने इस हमले को सही तो नहीं ठहराया, लेकिन इसके लिए सार्वजनिक तौर पर इजरायल की आलोचना भी नहीं की, जो अमेरिका का एक प्रमुख सहयोगी है। ट्रंप ने कहा कि इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा निर्देशित यह एकतरफा कार्रवाई "इज़राइल या अमेरिका के उद्देश्यों को आगे नहीं बढ़ाती।" हालांकि उन्होंने बहुत हल्का विरोध जताया और यहां तक कहा कि, "यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना शांति के अवसर के रूप में काम कर सकती है।"
दोहा पर हमला नेतन्याहू का था, मेरा नहीं: Trump
ट्रंप ने दोहा पर इजरायली हमले को लेकर सोशल मीडिया पर लिखा, "यह प्रधानमंत्री नेतन्याहू का निर्णय था, मेरा नहीं।" इस दौरान ट्रंप ने अमेरिका-कतर संबंधों में तनाव के बीच संतुलन साधने की कोशिश की। बता दें की हाल ही में कतर ने अमेरिका और उसके विरोधी ईरान (और उसके सहयोगियों जैसे हमास) के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। वहीं अल उदीद एयरबेस में अमेरिका के 10,000 सैनिक तैनात हैं, जो US Central Command का क्षेत्रीय मुख्यालय है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ को निर्देश दिया था कि वे दोहा पर संभावित हमले की जानकारी कतर को दें। लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि अमेरिका की चेतावनी "दुर्भाग्यवश, हमले को रोकने के लिए बहुत देर से" दी गई।
कतर ने अमेरिका की पूर्व चेतावनी को किया खारिज
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने सोशल मीडिया (X) पर यह दावा खारिज कर दिया कि कतर को अमेरिका से कोई पूर्व चेतावनी मिली थी। इसके बावजूद कतर ट्रंप के साथ अपने संबंधों को और गहरा करना चाहता है। इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि कतर ने ट्रंप को हाल ही में 400 मिलियन डॉलर का एक बोइंग 747 जेट उपहार में दिया है, जिसे "नए एयर फ़ोर्स वन" में बदला जाना है। ट्रंप ने कहा कि उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह विमान एक राष्ट्रपति पुस्तकालय को दान कर दिया जाएगा और संग्रहालय में रखा जाएगा।
कतर को लेकर क्या बोले ट्रंप
ट्रंप ने कहा, "मैं कतर को अमेरिका का मजबूत सहयोगी और मित्र मानता हूं, और हमले के स्थान को लेकर बेहद खेद प्रकट करता हूं।," यह कहकर ट्रंप ने कतर के साथ अपने रिश्तों में संभावित तनाव को दूर करने का प्रयास किया। उन्होंने दोहा पर इजरायली हमले को न तो सही ठहराया और न ही गलत।
कतर था हमास का समर्थक
इज़रायल-हमास युद्ध से पहले, कतर हर महीने लाखों डॉलर गाजा भेजता था, जिससे हमास की शासन व्यवस्था चलती थी।
इसके अलावा, कतर ने तालिबान और मुस्लिम ब्रदरहुड के नेताओं की भी मेज़बानी की है। इससे वह इजरायल के निशाने पर आ गया।
ट्रंप ने कहा-हमास का सफाया जरूरी
ट्रंप ने कहा, "हमास का सफाया एक उचित लक्ष्य है।" ट्रंप ने गाज़ा युद्ध को समाप्त करने और 48 इज़रायली बंधकों की रिहाई के प्रयास में हैं, जिनमें से अभी लगभग 20 जीवित माने जाते हैं। हमले के बाद, ट्रंप ने इज़रायल और कतर दोनों के नेताओं से बात की, जिनमें कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी भी शामिल हैं। ट्रंप ने कहा कि "मैंने उन्हें आश्वस्त किया कि उनके देश की ज़मीन पर ऐसा कुछ फिर कभी नहीं होगा।"
दोहा पर इजरायल के हमले से संकट में अमेरिका
मंगलवार को इज़रायल ने खतरनाक दांव खेला और उसने कतर की राजधानी दोहा में हमला कर दिया। विश्लेषकों के अनुसार इस हमले ने युद्धविराम वार्ताओं को विषाक्त कर दिया। साथ ही खाड़ी क्षेत्र में राजनीतिक हलचल मचा दी और अमेरिका द्वारा खाड़ी सहयोगियों को दी गई सुरक्षा गारंटी पर सवाल खड़े कर दिए। अमेरिका ने दावा किया कि उसे पहले से हमले की जानकारी दी गई थी, लेकिन कतर का कहना है कि बम गिरते समय ही उन्हें सूचित किया गया। कतर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अली अंसारी ने कहा, "हमले के दौरान ही हमें जानकारी मिली।"
ह्वाइट हाउस ने कतर हमले पर कहा-जगह को चुनाव गलत हुआ
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने कतर पर इजरायली हमले को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि "राष्ट्रपति ट्रंप को हमले की लोकेशन को लेकर बेहद दुख है। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए अपने विशेष दूतों को निर्देशित किया था कि कतर को समय रहते सूचित किया जाए।" उन्होंने आगे कहा कि, "कतर एक संप्रभु राष्ट्र और अमेरिका का करीबी सहयोगी है, जो इजरायल और हमास के बीच शांति समझौता कराने के लिए बहुत मेहनत और साहस के साथ काम कर रहा है।"
"अब्राहम समझौते" पर मंडराता संकट
इज़रायल के चार अरब देशों (UAE, बहरीन, मोरक्को, सूडान) के साथ हुए "अब्राहम समझौते" का भविष्य इस हमले के बाद अब संदेह में है। सऊदी अरब जैसे देश, जो पहले इसमें शामिल हो सकते थे, अब फिलिस्तीनी राज्य की मांग को फिर से शर्त बना रहे हैं। दोहा युद्धविराम वार्ताओं का मुख्य केंद्र रहा है। हमास के जिन नेताओं पर हमला हुआ, वे ट्रंप प्रशासन के नए युद्धविराम प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे थे, जिसमें 48 इज़रायली बंधकों की रिहाई की मांग की गई थी (20 जीवित माने जाते हैं)। (AP)